शिव · भक्ति
सम्बन्धित आरती, चालीसा, स्तोत्र, मन्त्र और प्रार्थना उनके अर्थ सहित पढ़ें।
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आरती

आरती
गोरक्षनाथ आरती
गोरक्षनाथ की आरती का पूर्ण पाठ, अर्थ और व्याख्या।
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आरती
आरती कीजै हनुमान लला की — हनुमान आरती
हनुमान लला की चयनित पूर्ण आरती, सरल भावार्थ और स्रोत-पाठ की सावधानियों सहित।
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आरती
जय गणेश देवा — गणेश जी की आरती
चयनित पाँच-पदी आरती का संपूर्ण देवनागरी पाठ, भावार्थ और पाठभेद-सूचना।
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आरती
जय पार्वती माता — चुना हुआ पूरा पाठ और सरल अर्थ
माता पार्वती की आरती—टेक और सात पद पहले, फिर हर पद का अर्थ, स्रोत और पाठभेद।
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आरती
ॐ जय शिव ओंकारा — शिव आरती
शिव आरती का चयनित आठ-पदी संपूर्ण देवनागरी पाठ, सरल अर्थ और स्रोत-सचेत विवेचन।
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चालीसा

चालीसा
भैरव प्रार्थना चालीसा — शिवगोरक्ष की नवरचना
चालीस पदों तथा आरम्भ और समापन पदों की नई शिवगोरक्ष प्रार्थना, AI की सहायता से रचित। यह समकालीन नवरचना है, ऐतिहासिक भैरव चालीसा नहीं।
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चालीसा
श्री दुर्गा चालीसा — चयनित संपूर्ण पाठ और हिंदी अर्थ
माँ दुर्गा की चालीसा के 40 चौपाई-पाठखंड, अलग समापन विनती, अर्थ और प्रामाणिक पाठभेद।
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चालीसा
श्री गणेश चालीसा — चयनित सम्पूर्ण पाठ और हिंदी भावार्थ
गणेश चालीसा का चयनित पूरा पाठ, 38 क्रमांकित चौपाइयाँ, तीन दोहे, सरल अर्थ और विश्वसनीय पाठ-टिप्पणियाँ।
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चालीसा
शिव चालीसा — लाइसेंसयुक्त पाठ
शिव चालीसा का अलग 44-पदों वाला MIT-लाइसेंसयुक्त पाठ; रोमन लिप्यन्तरण, अर्थ और व्याख्या सहित।
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स्तोत्र

स्तोत्र
आदित्यहृदयम्: सम्पूर्ण ३१ श्लोक और सरल हिंदी अर्थ
रणभूमि में थके राम को अगस्त्य सूर्य-स्तुति सुनाते हैं; कथा में प्रकाश, साहस और मन की दृढ़ता जुड़े हैं।
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स्तोत्र
अन्नपूर्णा स्तोत्रम्: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और पाठभेद
भोजन, करुणा, ज्ञान और वैराग्य को जोड़ने वाली माँ अन्नपूर्णा की काशी-केन्द्रित प्रार्थना।
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स्तोत्र
बिल्वाष्टकम् — सम्पूर्ण संस्कृत पाठ और हिन्दी अर्थ
शिव को बिल्वपत्र अर्पण की आठ-श्लोकी स्तुति और पाठान्तरों की स्पष्ट जानकारी।
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स्तोत्र
श्रीदक्षिणामूर्ति स्तोत्रम् (दक्षिणामूर्त्यष्टकम्)
गुरु-रूप शिव के ज्ञान और अद्वैत विषयक दस श्लोक; १९१० के मुद्रित स्रोत से संपादित पाठ।
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स्तोत्र
देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्: मूल पाठ, हिन्दी अर्थ और पाठभेद
क्षमा की बारह-पदीय प्रार्थना जो पूजा की कमी और जीवन की भूलों के बीच मातृकरुणा का आश्वासन खोजती है।
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स्तोत्र
गणेशपञ्चरत्नम्: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और पाठभेद
गणेश की आनन्दमय, करुणामय और अन्तर्यामी छवि को प्रकट करते पाँच पद तथा उनसे अलग फलश्रुति।
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स्तोत्र
श्रीकालभैरवाष्टकम्
काशीपति कालभैरव की आठ श्लोकों वाली स्तुति; फलश्रुति अलग और मुद्रित पाठभेद स्पष्ट।
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स्तोत्र
श्री लिङ्गाष्टकम् — सम्पूर्ण संस्कृत पाठ और अर्थ
शिवलिङ्ग की स्तुति के आठ संस्कृत श्लोक, सरल हिन्दी अर्थ तथा प्रमाणित पाठभेद।
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स्तोत्र
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम् (अयि गिरिनन्दिनि) — २१ पदों का पाठ
दुर्गा के साहस, शक्ति, सौन्दर्य और करुणा का लयपूर्ण स्तोत्र—२१ पदों वाले एक चिह्नित पाठ के अनुसार।
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स्तोत्र
निर्वाणषट्कम् (आत्मषट्कम्) — छह श्लोकों का अद्वैत पाठ
अद्वैत में चैतन्य और आत्मपहचान को समझाने वाले छह श्लोक, पुराने मुद्रित स्रोत पर आधारित।
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स्तोत्र
श्रीरुद्राष्टकम् — सम्पूर्ण पाठ और अर्थ
शिव के निराकार चैतन्य से नीलकण्ठ स्वरूप तक की आठ संस्कृत स्तुतियाँ, जिनका समापन विनम्र शरणागति में होता है।
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स्तोत्र
शिवमहिम्नःस्तोत्रम्
शिव-महिमा के सामने वाणी की सीमा स्वीकार करते हुए दर्शन, कथाओं और भक्ति से समृद्ध स्तोत्र।
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स्तोत्र
शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् — सम्पूर्ण मूल पाठ और अर्थ
न–म–शि–वा–य के पाँच अक्षर-श्लोकों में शिव-स्तुति; १९१२ की पृथक फलश्रुति और स्रोत-टिप्पणियों सहित।
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स्तोत्र
शिवताण्डवस्तोत्रम्
शिव के प्रचण्ड नृत्य, करुणा, तप और समभाव की लयपूर्ण संस्कृत स्तुति।
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स्तोत्र
विष्णुसहस्रनाम: महाभारत का १४२-श्लोक पाठ और अर्थ
भीष्म युधिष्ठिर को विष्णु के सहस्र नामों की स्तुति सुनाते हैं; भूमिका धर्म-प्रश्न और अंत में फलश्रुति है।
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