स्तोत्र
विविध भक्ति-परम्पराओं के स्तुति-पाठ।
21 पाठ

स्तोत्र
आदित्यहृदयम्: सम्पूर्ण ३१ श्लोक और सरल हिंदी अर्थ
रणभूमि में थके राम को अगस्त्य सूर्य-स्तुति सुनाते हैं; कथा में प्रकाश, साहस और मन की दृढ़ता जुड़े हैं।
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अन्नपूर्णा स्तोत्रम्: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और पाठभेद
भोजन, करुणा, ज्ञान और वैराग्य को जोड़ने वाली माँ अन्नपूर्णा की काशी-केन्द्रित प्रार्थना।
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बिल्वाष्टकम् — सम्पूर्ण संस्कृत पाठ और हिन्दी अर्थ
शिव को बिल्वपत्र अर्पण की आठ-श्लोकी स्तुति और पाठान्तरों की स्पष्ट जानकारी।
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श्रीदक्षिणामूर्ति स्तोत्रम् (दक्षिणामूर्त्यष्टकम्)
गुरु-रूप शिव के ज्ञान और अद्वैत विषयक दस श्लोक; १९१० के मुद्रित स्रोत से संपादित पाठ।
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देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्: मूल पाठ, हिन्दी अर्थ और पाठभेद
क्षमा की बारह-पदीय प्रार्थना जो पूजा की कमी और जीवन की भूलों के बीच मातृकरुणा का आश्वासन खोजती है।
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गणेशपञ्चरत्नम्: सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और पाठभेद
गणेश की आनन्दमय, करुणामय और अन्तर्यामी छवि को प्रकट करते पाँच पद तथा उनसे अलग फलश्रुति।
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श्रीकालभैरवाष्टकम्
काशीपति कालभैरव की आठ श्लोकों वाली स्तुति; फलश्रुति अलग और मुद्रित पाठभेद स्पष्ट।
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कनकधारा स्तोत्रम् (लक्ष्मी स्तुति)
अठारह पदों में लक्ष्मी की करुणा-दृष्टि, मंगल और धन से आगे के कल्याण की मनोहर स्तुति।
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श्री लिङ्गाष्टकम् — सम्पूर्ण संस्कृत पाठ और अर्थ
शिवलिङ्ग की स्तुति के आठ संस्कृत श्लोक, सरल हिन्दी अर्थ तथा प्रमाणित पाठभेद।
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मधुराष्टकम् (अधरं मधुरं)
आठ पदों में श्रीकृष्ण के रूप, वेणु, सखाओं, यमुना और व्रज-जगत की मधुरता का भावपूर्ण गान।
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महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम् (अयि गिरिनन्दिनि) — २१ पदों का पाठ
दुर्गा के साहस, शक्ति, सौन्दर्य और करुणा का लयपूर्ण स्तोत्र—२१ पदों वाले एक चिह्नित पाठ के अनुसार।
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नारायणी स्तुति — देवीमाहात्म्य अध्याय ११
देवीमाहात्म्य के ११वें अध्याय में करुणा, मातृशक्ति और विश्व-रक्षा की ३३ श्लोकों वाली स्तुति।
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