स्तोत्र
विविध भक्ति-परम्पराओं के स्तुति-पाठ।
21 पाठ

स्तोत्र
निर्वाणषट्कम् (आत्मषट्कम्) — छह श्लोकों का अद्वैत पाठ
अद्वैत में चैतन्य और आत्मपहचान को समझाने वाले छह श्लोक, पुराने मुद्रित स्रोत पर आधारित।
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पुरुषसूक्तम् — ऋग्वेद १०.९०
विराट् पुरुष, विश्व-उद्भव, यज्ञ-रूपक और सृष्टि की एकात्मता पर ऋग्वेद की सोलह ऋचाएँ।
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श्रीरुद्राष्टकम् — सम्पूर्ण पाठ और अर्थ
शिव के निराकार चैतन्य से नीलकण्ठ स्वरूप तक की आठ संस्कृत स्तुतियाँ, जिनका समापन विनम्र शरणागति में होता है।
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संकटमोचन हनुमानाष्टक
हनुमान के आठ संकट-हरण प्रसंग, अंत में भक्त की अपनी विनती और समापन-दोहा।
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शिवमहिम्नःस्तोत्रम्
शिव-महिमा के सामने वाणी की सीमा स्वीकार करते हुए दर्शन, कथाओं और भक्ति से समृद्ध स्तोत्र।
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शिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् — सम्पूर्ण मूल पाठ और अर्थ
न–म–शि–वा–य के पाँच अक्षर-श्लोकों में शिव-स्तुति; १९१२ की पृथक फलश्रुति और स्रोत-टिप्पणियों सहित।
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शिवताण्डवस्तोत्रम्
शिव के प्रचण्ड नृत्य, करुणा, तप और समभाव की लयपूर्ण संस्कृत स्तुति।
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श्रीसूक्तम्: १५ वैदिक ऋचाएँ, हिन्दी अर्थ और पाठ-समीक्षा
श्री/लक्ष्मी की वैदिक स्तुति: ज्योति, अन्न, सत्य, परिवार और स्थायी मंगल की १५ ऋचाओं का स्रोत-सचेत पाठ।
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विष्णुसहस्रनाम: महाभारत का १४२-श्लोक पाठ और अर्थ
भीष्म युधिष्ठिर को विष्णु के सहस्र नामों की स्तुति सुनाते हैं; भूमिका धर्म-प्रश्न और अंत में फलश्रुति है।
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