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सम्बन्धित आरती, चालीसा, स्तोत्र, मन्त्र और प्रार्थना उनके अर्थ सहित पढ़ें।
आरती
कृष्ण की ब्रज-प्रभावित आरती—टेक सहित चार पद, उनके अर्थ, स्रोत और पाठभेद।
स्तोत्र
आठ पदों में श्रीकृष्ण के रूप, वेणु, सखाओं, यमुना और व्रज-जगत की मधुरता का भावपूर्ण गान।
भीष्म युधिष्ठिर को विष्णु के सहस्र नामों की स्तुति सुनाते हैं; भूमिका धर्म-प्रश्न और अंत में फलश्रुति है।
मन्त्र और जप
ध्रुव को नारद द्वारा बताया गया बारह-अक्षरी वासुदेव-नमस्कार मन्त्र—स्रोत और भावार्थ सहित।
नारायण के आठ-अक्षरी नमस्कार-मन्त्र की सरल, स्रोत-आधारित और परम्परा-सचेत व्याख्या।