पढ़ने की सहायता

सरल रोमन संस्कृत के लिए देवनागरी-आधारित पठन-सहायता है। IAST में शास्त्रीय लिप्यंतरण के भेद सुरक्षित हैं। जहाँ दिया हुआ रोमन पाठ नहीं है, वहाँ IAST देवनागरी से स्वतः बनाया गया है; यह प्रमाणित उच्चारण-निर्देश नहीं है। हिन्दी और अन्य लोकभाषा के गीतों में दिए गए शब्द और बोलचाल के स्वरान्त सुरक्षित रहते हैं; सरल रोमन स्पष्ट लिप्यंतरण-चिह्नों को सुलभ बनाता है। उनके शास्त्रीय दृश्य में दिया हुआ रोमन पाठ रहता है, संस्कृत उच्चारण नहीं गढ़ा जाता। बीजाक्षरों का चुना हुआ रोमन रूप जहाँ स्पष्ट है, सुरक्षित रखा गया है।

मन्त्र और जप

गोरक्षनाथ शाबर मन्त्र — ॐ शिव गोरक्ष योगी

शिव और गोरक्षनाथ का चार-अंगों वाला संक्षिप्त नाथ आह्वान; प्रारम्भिक स्रोत और साधना-अनुमति की समीक्षा बाकी है।

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पाठ, अर्थ और व्याख्या

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ॐ शिव गोरक्ष योगी

अर्थ

यह गुरु गोरक्षनाथ को शिवतत्त्व से जुड़े योगी के रूप में स्मरण करने का संक्षिप्त आह्वान है। ‘ॐ’ पवित्र आरम्भिक ध्वनि है; आगे शिव, गोरक्ष और योगी का स्मरण है। यह मन्त्र का भावार्थ है, सामान्य संस्कृत वाक्य का निर्विवाद शब्दशः अनुवाद नहीं।

व्याख्या

इस संक्षिप्त सूत्र में चार इकाइयाँ हैं। ‘ॐ’ का प्रयोग पवित्र आह्वान के रूप में है; उसका एक ही सीमित शब्दार्थ नहीं लगाया गया। ‘शिव’ से शिव-देवता और व्यापक शैव परम्परा का मंगल-भाव जुड़ता है। ‘गोरक्ष’ नाथ गुरु गोरखनाथ का संस्कृतनिष्ठ नाम है। ‘योगी’ साधना, संयम और ज्ञान से जुड़े गुरु-आदर्श का सूचक है। यहाँ स्पष्ट क्रियापद नहीं है; ‘नमन’ को भावार्थ के रूप में समझाया गया है, मूल मन्त्र में नया शब्द बनाकर नहीं जोड़ा गया। नाथ-स्रोत इसे मूल शाबर-मन्त्र कहता है; इसके भाषिक और परम्परागत सन्दर्भ का विशेषज्ञ सत्यापन बाकी है। स्रोत के श्वास और अनुष्ठान सम्बन्धी विवरण यहाँ अभ्यास-विधि नहीं बनाए गए।

सन्दर्भ और उपयोग

चयनित पाठ का परिचय: यहाँ नाथ-परम्परा के समकालीन स्रोत में उपलब्ध केवल एक चार-अंगों वाला संक्षिप्त मन्त्र दिया जा रहा है। रचयिता, सबसे पुराना पाण्डुलिपि-साक्ष्य और पुनर्प्रकाशन-अधिकार स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं। यह सम्पादकीय अध्ययन-प्रारूप है, अनुष्ठान कराने का निर्देश नहीं। 1

सम्पूर्ण मूल मन्त्र — देवनागरी

ॐ शिव गोरक्ष योगी

यह चयनित मन्त्र का पूरा मूल पाठ है। अंग्रेजी लेख के प्रथम खण्ड में इन्हीं शब्दों का IAST रूप oṃ shiva goraksh yogīoṃ śiva gorakṣa yogī है; वहाँ अंग्रेजी अनुवाद को मूल मन्त्र का स्थान नहीं दिया गया। नाथ परम्परा के एक गुरु-सम्बद्ध लेख में यही मन्त्र ‘मूल शाबर मन्त्र’ के रूप में स्पष्ट लिखा है और दूसरे नाथ-प्रार्थना संग्रह के आरम्भ में भी यही चार शब्द हैं। वह पूरा संग्रह इस मन्त्र का अंग नहीं है। 1 2

सरल हिन्दी भावार्थ

भावार्थ: शिवतत्त्व से सम्बद्ध महान योगी गुरु गोरक्षनाथ का पवित्र स्मरण और आह्वान; साधक अपने चित्त को शिव, गुरु और योग के अनुशासित आदर्श की ओर मोड़ता है। यहाँ ‘नमन करता हूँ’ समझना भक्ति के स्तर पर उपयुक्त हो सकता है, किन्तु मूल चार पदों में ‘नमः’ अथवा ‘नमस्कार’ जैसा अलग शब्द लिखा नहीं है। इसलिए इस अर्थ को शब्दशः संस्कृत अनुवाद नहीं, सावधानीपूर्वक प्रस्तुत भावार्थ कहना चाहिए। 1

इसे शाबर मन्त्र क्यों कहा जाता है? प्राथमिक नाथ-स्रोत के लेखक के अनुसार ‘शाबर’ मन्त्र जनभाषाओं, बोलियों और सांकेतिक गुरु-परम्परा से जुड़े मन्त्रों की श्रेणी हैं। इनका व्यवहार संस्कृत के औपचारिक वैदिक पाठ से भिन्न हो सकता है। यहाँ प्रयुक्त शब्द संस्कृत-जनित हैं, इसलिए इसे किसी एक आधुनिक भाषा या केवल शुद्ध संस्कृत गद्य के खाँचे में डालना उचित नहीं। ‘मूल शाबर मन्त्र’ इस चयनित स्रोत का अपना परम्परागत वर्गीकरण है—यह दावा नहीं कि सभी नाथ शाखाएँ इसके इतिहास या दीक्षा की एक जैसी व्याख्या करती हैं। 1 5

सूत्र में कोई स्पष्ट क्रियापद नहीं है; देवता, गुरु और योगी का स्मरण प्रमुख है। इसे किसी वेद-मन्त्र का छन्द, ऋषि, विनियोग या स्वर निर्धारित करके प्रस्तुत करने का ऐतिहासिक आधार नहीं मिला है। स्रोत में आसन, प्राणायाम एवं मन्त्र-जप के प्रसंग हैं, किन्तु उनका अनुकरण इस अध्ययन-पाठ में नहीं कराया गया है।

नाथ परम्परा और ऐतिहासिक सन्दर्भ

नाथ परम्परा की अनेक धाराएँ शिव को आदिनाथ से जोड़ती हैं और गोरक्षनाथ तथा मत्स्येन्द्रनाथ को प्रमुख गुरु मानती हैं। विद्वानों के अध्ययन में संन्यासी और गृहस्थ समुदायों, क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृत रचनाओं तथा योग एवं भक्ति से जुड़े विविध रूप सामने आते हैं। ये बातें परम्परा का परिचय देती हैं; इन्हें इस विशेष चार-शब्द मन्त्र की रचना-तिथि या रचयिता का प्रमाण नहीं मानना चाहिए। 5 6

Nath TraditionNatha Tradition के लेख के अन्त में गुरु योगी मत्स्येन्द्रनाथ महाराज का नाम है। वहाँ मन्त्र ‘ॐ शिव गोरक्ष योगी’ स्पष्ट उद्धृत है। आधुनिक नाथ-प्रार्थना संग्रह में भी यह आरम्भिक पंक्ति के रूप में आता है। दोनों से उसके आज के प्रयोग का साक्ष्य मिलता है, किन्तु किसी प्राचीन पाण्डुलिपि, मध्यकालीन प्रथम रचना या स्वयं गोरक्षनाथ के हस्ताक्षर का नहीं। 1 2

एक २०१७ का हिन्दी ब्लॉग भी यही पाठ ‘बीज मन्त्र’ शीर्षक के नीचे देता है। इससे सूत्र के प्रयोग की अतिरिक्त सूचना मिलती है; किन्तु उस ब्लॉग से सभी सम्प्रदायों में इसकी विधिवत बीज-वर्गीकरण या विशिष्ट आध्यात्मिक अधिकारिता सिद्ध नहीं होती। 3

पाठभेद और पाठ की सीमाएँ

  1. यहाँ चयनित पाठ: ॐ शिव गोरक्ष योगी — स्वतंत्र संक्षिप्त मन्त्र; किसी दूसरे मन्त्र की पंक्ति इसमें नहीं जोड़ी गई। 1
  2. छोटा विकल्प: शिव गोरक्ष — प्राथमिक गुरु-सम्बद्ध लेख में अलग शाबर-बीज रूप के रूप में दिया गया है। उसे चार-अंग वाले मन्त्र का दूसरा चरण न समझें। 1
  3. मुद्रण-विराम: ॥ ॐ शिव गोरक्ष योगी ॥ — अन्य नाथ-प्रार्थना संग्रह में यही शब्द दोहरे दण्ड से घिरे मिलते हैं। दण्ड कोई नया शब्द नहीं है। 2
  4. रोमन लेखन: Om Shiva Goraksha Yogi जैसी सामान्य अंग्रेजी वर्तनी के बदले इस संस्करण में समान पाठ का IAST oṃ shiva goraksh yogīoṃ śiva gorakṣa yogī दिया है। यह किसी गुरु-विशेष द्वारा प्रमाणित स्वर-निर्देश नहीं है। 4

नाथ अभिवादन में ‘आदेश’ शब्द अत्यन्त दिखाई देता है, पर केवल आसपास के प्रार्थना-पाठ में इसका उपयोग होने से इसे चयनित छोटे मन्त्र का अनिवार्य पाँचवाँ पद नहीं माना गया है। दीर्घ गोरक्ष गायत्री, गुरु-वन्दना, चालीसा और आरती सभी अलग पाठ हैं।

भक्ति-सन्देश और सामान्य पाठक

भक्ति के स्तर पर यह मन्त्र शिव, गुरु और योग की स्मृति एक साथ उपस्थित करता है। पाठक इससे एकाग्रता, संयम, गुरु के प्रति कृतज्ञता और आत्मनिरीक्षण का सन्देश ग्रहण कर सकता है। ये शिवगोरक्ष की सम्पादकीय व्याख्याएँ हैं; इन्हें गोरक्षनाथ का ऐतिहासिक मूल कथन नहीं बताया गया है। निश्चित चमत्कारिक लाभ का कोई दावा नहीं किया गया।

अध्ययन और अनुष्ठान की अलग सीमाएँ

अभ्यास-वर्गीकरण: UNKNOWN_REVIEW_REQUIRED। उपलब्ध परम्परा-स्रोत मन्त्र का सम्बन्ध जप और श्वास-सम्बन्धी साधनाओं से बताते हैं; मगर किसी वेबसाइट पर पाठ उपलब्ध होना सभी शाखाओं में अभ्यास-अधिकार मिलने के समान नहीं है। इस संस्करण में जप-संख्या, प्राण-रोध, श्वास-तकनीक, दीक्षा-विधि, न्यास, सिद्धि-प्राप्ति की प्रक्रिया या विशेष अनुष्ठान नहीं दिया गया। अभ्यास-सम्बन्धी सामग्री तभी जोड़ी जानी चाहिए जब योग्य नाथ-परम्परा विशेषज्ञ और सम्पादक पृथक् समीक्षा करें। 1 4

सामान्य प्रश्न

क्या पूरा मन्त्र यही चार पद हैं? चयनित समकालीन नाथ-स्रोत में हाँ। यह सम्पूर्ण नाथ-मन्त्र-संग्रह नहीं है; केवल एक निर्दिष्ट लघु पाठ है। 1

क्या यह वेद से लिया गया है? इस सटीक पाठ के लिए किसी वेद, उपनिषद् या पुराण का प्रमाणित अध्याय-मन्त्र स्थान नहीं मिला। यहाँ उपलब्ध साक्ष्य नाथ शाबर-परम्परा से है। गोरख और गोरक्ष में क्या अन्तर है? यहाँ दोनों एक ही नाथ गुरु से सम्बद्ध नामरूप हैं; फिर भी चयनित मूल में ‘गोरक्ष’ ही रखा गया है। 5

‘शिव गोरक्ष’ अलग से जोड़ना होगा? नहीं। यह एक स्वतंत्र छोटा पाठान्तर है, चार शब्दों के बाद जुड़ने वाली नई पंक्ति नहीं। 1

क्या ‘शिव’ और ‘गोरक्ष’ एक ही देवता हैं? विविध नाथ धाराओं में इनके सम्बन्ध की अनेक भक्ति और दार्शनिक व्याख्याएँ सम्भव हैं। यह मन्त्र शिवतत्त्व और गोरक्ष गुरु का सम्बन्ध दिखाता है; सभी परम्पराओं का एक-सा सिद्धान्त प्रमाणित नहीं करता। क्या मैं यहाँ दी गई पंक्ति से प्राणायाम अथवा सिद्धि-अनुष्ठान शुरू करूँ? यह लेख कोई ऐसी सलाह नहीं देता। गुरु-परम्परा की उचित समीक्षा और मार्गदर्शन के बिना जटिल अभ्यासों को लेख से निर्देश मानना ठीक नहीं। इस मन्त्र के रचयिता क्या गोरक्षनाथ थे? उपलब्ध जाँचे गए साक्ष्यों से ऐसा प्रमाण नहीं मिला। मूल रचयिता और प्रथम लिखित रूप अज्ञात हैं।

स्रोत, श्रेय और लाइसेंस

संस्थापक द्वारा अधिकृत शैक्षिक प्रस्तुति। स्वतंत्र पाठ और विशेषज्ञ समीक्षा अधूरी है। यह दीक्षा या व्यक्तिगत अनुष्ठान की अनुमति नहीं है।

Inherited traditional wording; selected witness cited below. Romanization, meanings and explanations prepared for ShivGoraksh. No modern source translation, page layout or recording reproduced.

इस पाठ के लेख और पदवार व्याख्या में अर्थ की अलग अभिव्यक्तियाँ हैं; दोनों प्रस्तुत हैं।

संस्करण का मूल रोमन पाठ

इस संस्करण में दिया गया रोमन पाठ, सरल रोमन प्रदर्शन से पहले की वर्तनी और शब्द-रूपों सहित।

  1. 1

    oṃ śiva gorakṣa yogī

स्रोत तथा सम्पादकीय स्थिति

  • 1 गुरु योगी मत्स्येन्द्रनाथ महाराज; Short practice of Gorakhnath-mantra, Natha Tradition — चयनित पूरा मन्त्र तथा छोटा विकल्प। https://nathas.org/en/tradition/material/short-practice-of-goraksha-mantra/
  • 2 Nath Samparday ki Paramparik Prarthana, Shri Goraksh Nathji / योगी विलास नाथ — लम्बी प्रार्थना में प्रारम्भिक आह्वान। https://guruvilasnath.com/shlok.php?unique_id=260424071803210825298
  • 3 नाथ साधुओ के सुबह के ध्यान मंत्र, Shabar Mantar, १ जनवरी २०१७ — द्वितीयक हिन्दी सूचना। https://shabarmantars.blogspot.com/2017/01/nath-sadhuo-ke-subah-ke-dhyan-mantar.html
  • 4 The practice of Goraksha-mantra, Natha Tradition — छोटे मन्त्र का दूसरी जगह उल्लेख। https://nathas.org/en/tradition/material/goraksha-mantra/
  • 5 Adrián Muñoz, Nātha Sampradāya, Oxford Bibliographies — नाथ-परम्परा का विद्वत्परक परिचय, मन्त्र-पाठ का साक्ष्य नहीं। https://academic.oup.com/reference/62357/reference-article-abstract/554519687
  • 6 Véronique Bouillier, A Survey of Current Researches on India’s Nāth Yogīs, २०१३ — शोध-सार से सामान्य ऐतिहासिक सन्दर्भ। https://compass.onlinelibrary.wiley.com/doi/abs/10.1111/rec3.12041

शेष समीक्षा: प्रारम्भिक ऐतिहासिक पाठ-साक्ष्य, रचयिता, पुनरुत्पादन-अधिकार, नाथ विशेषज्ञ द्वारा अर्थ/उच्चारण/शाबर-वर्ग की जाँच, दोनों भाषाओं की सम्पादकीय स्वीकृति और अभ्यास-अनुमति।

पदों पर अतिरिक्त टिप्पणी

१. ॐ — पवित्र आह्वान। ॐ अनेक भारतीय दर्शन और उपासना-पद्धतियों में विशेष पवित्र ध्वनि है। यहाँ स्रोत-पाठ के आरम्भ में इसका प्रयोग है। इसका सम्पूर्ण आध्यात्मिक अर्थ किसी एक साधारण हिन्दी शब्द में सीमित करना उचित नहीं। यह पाठ वैदिक स्वरचिह्नों वाला मन्त्र-पाठ भी नहीं है। 1

२. शिव — शिव और मंगलतत्त्व। ‘शिव’ से भगवान शिव का स्मरण होता है; ‘शिव’ शब्द के साथ कल्याण या मंगल का भाव भी जुड़ा है। नाथ परम्परा में शिव, आदिनाथ और योग की गहरी सम्बद्धता मिलती है। फिर भी इस मन्त्र के आधार पर समस्त नाथ शाखाओं में गोरक्षनाथ-शिव सम्बन्ध की एक ही दार्शनिक व्याख्या निश्चित कर देना उचित नहीं। 1 5

३. गोरक्ष — गुरु गोरखनाथ। ‘गोरक्ष’ संस्कृतनिष्ठ रूप है; प्रचलित रूप ‘गोरख’, ‘गोरखनाथ’ तथा ‘गोरक्षनाथ’ भी मिलते हैं। नाथ साहित्य और योग-परम्परा में वे अत्यन्त प्रमुख गुरु माने जाते हैं। उपलब्ध साक्ष्य से किसी खास गुरु के ऐतिहासिक काल पर अन्तिम मत स्थापित नहीं होता, और इस छोटे मन्त्र की प्राचीनता तो उससे भी सिद्ध नहीं होती। 5 6

४. योगी — योग-अनुशासन का आदर्श। यह शब्द योग-साधना के अनुशासन, अन्तर्मुखता और आत्मपरीक्षण का संकेत करता है। इस सन्दर्भ में गोरक्षनाथ को योगी-गुरु रूप में स्मरण किया जाता है। इसे यह दावा नहीं बनाना चाहिए कि केवल इस सूत्र को दोहराने से कोई निश्चित सिद्धि, आरोग्य, धन या अलौकिक उपलब्धि प्राप्त होगी। 1

  1. Short practice of Gorakhnath-mantra · स्रोत खोलें
  2. Nath Samparday ki Paramparik Prarthana · स्रोत खोलें
  3. नाथ साधुओ के सुबह के ध्यान मंत्र · स्रोत खोलें
  4. The practice of Goraksha-mantra · स्रोत खोलें
  5. Nātha Sampradāya · स्रोत खोलें
  6. A Survey of Current Researches on India’s Nāth Yogīs · स्रोत खोलें