पढ़ने की सहायता

सरल रोमन संस्कृत के लिए देवनागरी-आधारित पठन-सहायता है। IAST में शास्त्रीय लिप्यंतरण के भेद सुरक्षित हैं। जहाँ दिया हुआ रोमन पाठ नहीं है, वहाँ IAST देवनागरी से स्वतः बनाया गया है; यह प्रमाणित उच्चारण-निर्देश नहीं है। हिन्दी और अन्य लोकभाषा के गीतों में दिए गए शब्द और बोलचाल के स्वरान्त सुरक्षित रहते हैं; सरल रोमन स्पष्ट लिप्यंतरण-चिह्नों को सुलभ बनाता है। उनके शास्त्रीय दृश्य में दिया हुआ रोमन पाठ रहता है, संस्कृत उच्चारण नहीं गढ़ा जाता। बीजाक्षरों का चुना हुआ रोमन रूप जहाँ स्पष्ट है, सुरक्षित रखा गया है।

नाथ परम्परा की धूनी

नाथ धूनी की परम्परा, सार्वजनिक प्रार्थनाएँ और अध्ययन तथा परम्परागत अभ्यास का भेद जानें।

संदर्भ और स्रोत
इस पृष्ठ पर

इस पूजा के बारे में

नाथ मन्त्र को उसी के वास्तविक प्रसंग में समझना क्यों जरूरी है

मन्त्र का अर्थ हर कार्य के नीचे लगा देने वाला एक समान वाक्य नहीं है। गुरु-स्तुति, सामूहिक जयघोष, उपदेशात्मक वचन, किसी विशिष्ट साधना-वस्तु का मन्त्र और अग्नि-सम्बन्धी आह्वान—सबके प्रयोजन और स्रोत अलग हैं। इस मार्गदर्शिका में सार्वजनिक संयुक्त गुरु-प्रार्थना का पूरा पाठ है; इससे यह दावा नहीं किया जाता कि गोरखपुर में पुजारी प्रत्येक खण्ड को अंगारे सँभालते समय बोलते हैं। दूसरी नाथ संस्था का चिमटा, ज्योति या धूप मन्त्र गोरखपुर की विधि पर चुपचाप लागू करना भी अनुचित है। 3815

गोरखपुर मन्दिर की पूजा-पद्धति में अन्य पूजास्थलों के साथ श्रीअखण्डधूना पर धूप-आरती का उल्लेख है, पर उस अवसर पर अग्नि प्रज्वलित करने का पूरा विशिष्ट मन्त्र नहीं दिया गया। कुछ पूजा-कर्मों में मौन/मानसिक स्मरण का भी स्थान है। इसलिए इस खाली स्थान को कल्पित संस्कृत से भरना सही नहीं। 3

सार्वजनिक प्रार्थनाएँ और पाठभेद

नाथ समुदाय की गुरु-प्रार्थनाओं में वर्तनी और पद-चयन के भेद मिलते हैं। यहाँ गोरख गुरु वन्दना का पहचाना गया संस्करण लिया गया है; सम्बन्धित भेद स्रोत और पाठ-टिप्पणियों में सुरक्षित हैं। प्रार्थना प्रकाशित होने का अर्थ धूनी जलाना या संभालना सिखाना नहीं है। 11 8 12

एक अन्य नाथ गुरु-परम्परा की साधना-वस्तु सूची में धूप, ज्योति, चिमटा और डमरू के अलग मन्त्र मिलते हैं। उनके अनुष्ठान-अधिकार तथा पुनर्प्रकाशन-अधिकार सत्यापित न होने से उन्हें यहाँ स्रोत और नाम सहित दर्ज किया गया है, सार्वत्रिक धूनी-विधि के रूप में नहीं। 15

नाथ धूनी क्या है?

धूनी या धूना उस अग्नि-स्थल को कहा जा सकता है जिसे कुछ योगी और संन्यासी परम्पराओं में धार्मिक-साधनात्मक महत्व प्राप्त है। नाथ सन्दर्भ में इसका सम्बन्ध गुरु-स्मृति, एकाग्रता, तप (अनुशासित साधना), सामुदायिक उत्सव और परम्परा की निरन्तरता से हो सकता है। यह केवल घर का चूल्हा अथवा साधारण अलाव नहीं है। अलग-अलग संस्थाएँ इसकी मर्यादा और भूमिका अलग रूप में समझती हैं। 34

होम/हवन किसी विशिष्ट मन्त्र-विधि के अनुसार अग्नि में आहुति देने वाला यज्ञ-कर्म है। नाथ धूनी निरन्तर चलने वाला साधु-सम्बद्ध या संस्थागत पवित्र स्थल भी हो सकती है; इसलिए उसे अपने-आप हवन नहीं कहा जा सकता। इसी तरह हर नाथ मठ में धूनी होने का अनुमान भी उचित नहीं। केवल नाम से ईंधन, मन्त्र, अधिकारी अथवा अग्नि-संचालन की अनुमति निश्चित नहीं होती। यह मार्गदर्शिका परम्परा को समझाती है, क्रियान्वयन योग्य अग्नि-विधि नहीं देती। 12

धूनी, अखण्ड धूना, तप और विभूति—शब्दार्थ

भक्ति-भाषा में अखण्ड का अर्थ है निरन्तर या बिना टूटे हुए। गोरखपुर मन्दिर की प्रकाशित पूजा-पद्धति में श्रीअखण्डधूना का उल्लेख उन पूजनीय स्थलों में है जहाँ पुजारी धूप-आरती करते हैं। इससे मन्दिर में धूना की सार्वजनिक स्वीकृति प्रमाणित होती है; इससे अग्नि के आरम्भ की पौराणिक तिथि सिद्ध नहीं होती और न सामान्य पाठक को उसकी देखरेख करने की विधि मिलती है। 3

तप अनुशासन, धैर्य और साधना का व्यापक अर्थ रखता है। ‘ताप’ की उपमा को हर जगह शाब्दिक आग समझना सही नहीं। भस्म और विभूति कुछ शैव-नाथ प्रसंगों में पवित्र राख के नाम हैं। इंटरनेशनल नाथ ऑर्डर अपनी धूनी से सम्बन्धित विभूति का वर्णन करता है। इससे किसी भी साधारण आग की राख की पवित्रता या राख के औषधीय प्रभाव का दावा सत्यापित नहीं हो जाता। 42

इतिहास, चित्र-साक्ष्य और तिथि की सावधानी

नाथ समुदायों का इतिहास शैव योग, लोकभाषा की धार्मिक वाणी, गुरु-परम्परा, संन्यासी मठों तथा बदलते राजकीय-सामाजिक सम्बन्धों से जुड़ा है। वेरोनिक बुइये के शोध-सर्वेक्षण में ये कई अलग किन्तु सम्बद्ध अध्ययन-विषय हैं; इन्हें एक ही, बिना व्यवधान वाले और पूरी तरह दिनांकित संस्थागत इतिहास में समेटना उचित नहीं। किसी विशेष धूनी के ‘पौराणिक युग से लगातार जलने’ का कथन स्वतंत्र दिनांकित प्रमाण के बिना उस समुदाय की आस्था-परम्परा के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। 25

स्मिथसोनियन का एक निबन्ध सुलगती धूनी के पास तपस्वियों के अपेक्षाकृत बाद के चित्रांकन की चर्चा करता है। यह चित्रों का इतिहास है, वास्तविक प्रथा के आरम्भ की निश्चित तारीख नहीं। केवल बचे हुए चित्रों से पहले की प्रथा का होना या न होना निश्चित नहीं किया जा सकता। ?

आदिनाथ, मत्स्येन्द्रनाथ और गोरक्षनाथ

अनेक नाथ धाराओं में आदिनाथ को आदिगुरु के रूप में भगवान शिव माना जाता है। मत्स्येन्द्रनाथ और गोरक्षनाथ ऐसे प्रमुख गुरु हैं जिनसे गुरु-वंशावलियाँ, योग-ग्रन्थ और अनेक आख्यान जुड़े हैं। श्रद्धालुओं के लिए ये सम्बन्ध अर्थपूर्ण हैं, किन्तु भिन्न ग्रन्थ और समुदाय इनकी कथा अलग ढंग से सुनाते हैं। किसी गुरु को कालातीत अथवा अलौकिक संस्थापक बताने का कथन स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण न होने पर श्रद्धामूलक परम्परा के रूप में रखना चाहिए। 52

धूनी इन गुरुओं की साधना-निरन्तरता का प्रतीक बन सकती है, लेकिन यहाँ जाँचे गए किसी स्रोत से यह सिद्ध नहीं होता कि हर गोरक्षनाथ-भक्त के लिए एक ही अग्नि-अनुष्ठान अनिवार्य है। गोरखपुर मन्दिर की प्रकाशित प्रार्थना में गोरक्षनाथ और मत्स्येन्द्रनाथ की वन्दना है; उस प्रार्थना को अपने-आप अग्नि-प्रज्वलन की विधि नहीं मान सकते। 89

संस्थागत उदाहरण: गोरखपुर का श्रीअखण्डधूना

श्री गोरखनाथ मन्दिर की वेबसाइट पर विस्तृत दैनिक पूजा-पद्धति प्रकाशित है। उसमें मुख्य विग्रह के साथ मन्दिर के अन्य पूजनीय स्थलों की उपासना वर्णित है। धूप-आरती प्राप्त करने वाले स्थलों में श्रीअखण्डधूना भी सम्मिलित है। यह मन्दिर के अधिकृत पुजारियों के दैनिक क्रम का भाग है, जिसके आसपास अन्य अनेक सेवाएँ—भोग, दीप-आरती, पाठ और भण्डारा—भी होती हैं। केवल बाहर से दिखने वाली कुछ क्रियाओं को चुनकर उसका घरेलू धूनी-अनुष्ठान बना देना उचित नहीं। 3

मन्दिर की अलग प्रकाशित प्रार्थना गोरक्ष-सम्बोधन से आरम्भ होती है और कई स्तुतियों को जोड़ती है। उसमें सभी के लिए मान्य, स्वतंत्र धूनी बनाने, जलाने, राख निकालने या अनुष्ठान समाप्त करने की पूरी विधि नहीं दी गई है। किसी विशिष्ट स्थान के पास जाने, वहाँ से विभूति लेने या सहभागिता की अनुमति सीधे संबंधित संस्था से जानी जानी चाहिए। 8?

दूसरी नाथ संस्था: तुलना क्यों आवश्यक है

इंटरनेशनल नाथ ऑर्डर अपनी धूनी का वर्णन पवित्र अग्नि, पृथ्वी-माता के प्रतीक, सामूहिक साधना और विभूति के सन्दर्भ में करता है। यह उस विशिष्ट संगठन का अपना साक्ष्य है। इसे गोरखपुर मन्दिर, किसी दूसरी गुरु-परम्परा अथवा नवशिक्षु के घर पर यथावत लागू करने का अधिकार इससे नहीं मिलता। इसकी वेबसाइट का खोज-सूचक अंश उपलब्ध था, लेकिन प्रत्यक्ष पृष्ठ बाद में सुरक्षा-परीक्षण पर रुक गया; अतः विस्तार से अनुष्ठान-विधि या उद्धरण के लिए पुनः प्रत्यक्ष सत्यापन आवश्यक है। 4

एक अलग नाथ गुरु की प्रकाशित संक्षिप्त साधना में “ॐ शिव गोरक्ष योगी” और छोटा रूप “शिव गोरक्ष” मिलता है। उसी पाठ में जटिल मन्त्र तथा प्राणायाम के प्रसंग भी हैं। किसी मन्त्र का वेबसाइट पर मिलना शब्द-पाठ का प्रमाण हो सकता है, लेकिन इससे दीक्षा-सम्बद्ध या अग्नि-कर्म में उसके सार्वत्रिक उपयोग की अनुमति सिद्ध नहीं होती। 9

संन्यासी-अनुशासन और गृहस्थ-भक्ति में अन्तर

संन्यासी का निवास, समय, उपलब्ध वस्तुएँ, गुरु के प्रति दायित्व और धार्मिक पहचान पवित्र अग्नि के इर्द-गिर्द व्यवस्थित हो सकते हैं। इसके विपरीत दर्शनार्थी, विद्यार्थी या गृहस्थ मन्दिर जाकर, गोरक्षनाथ के विषय में पढ़कर, अधिकृत सार्वजनिक प्रार्थना सुनकर अथवा अग्नि सँभाले बिना गुरु का स्मरण करके जुड़ सकते हैं। दोनों सम्बन्ध महत्त्वपूर्ण हैं, पर वे ‘एक ही विधि में लकड़ी हटा देने’ के समान नहीं। अधिकार, स्वास्थ्य, समय और स्थान के दायित्व अलग होते हैं। 23

यह नहीं मानना चाहिए कि हर गृहस्थ को अनिश्चित काल तक अखण्ड अग्नि चलाने की परम्परागत अनुमति है। केवल प्राणायाम करना, कोई मन्त्र दोहराना या प्रतीकात्मक चित्र लगाना भी नाथ धूनी की स्थापना नहीं है। यह मार्गदर्शिका घरेलू अग्नि प्रज्वलन की योजना नहीं देता और ज्वाला से सिद्धि, रोग-मुक्ति अथवा अलौकिक रक्षा की गारंटी नहीं करता। 19

भस्म, विभूति और सम्मानपूर्वक व्यवहार

कुछ शैव और नाथ सन्दर्भों में भस्म से नश्वरता, पदार्थ के रूपान्तरण और वैराग्य का स्मरण जुड़ता है। इंटरनेशनल नाथ ऑर्डर अपनी धूनी के साथ विभूति का सम्बन्ध बताता है। इसका अर्थ किसी विशिष्ट समुदाय की धार्मिक समझ से बनता है; चूल्हे, मलबे या साधारण अलाव की राख रंग देखकर पवित्र नहीं हो जाती। उपलब्ध स्रोत भस्म को निश्चित औषधि, कीटाणुनाशक अथवा रोगमुक्ति का साधन प्रमाणित नहीं करते। 42

धार्मिक स्थल पर बिना अनुमति राख, गरम वेदी, अंगारे या साधन-सामग्री न छुएँ। यदि किसी मठ में विभूति प्रसाद रूप में दी जाए, तो स्थानीय सेवक से मर्यादा और सावधानियाँ पूछें; किसी और का आचरण देखकर उसकी नकल न करें। नाथ-विचार को समझने के लिए धुआँ भीतर लेना, अनपहचानी राख घाव पर लगाना या उसका सेवन करना आवश्यक नहीं है। 76

सार्वजनिक प्रार्थना और धूनी-विशेष की मन्त्र-विधि

पाठक को प्रत्येक प्रार्थना की सही भूमिका मिलनी चाहिए, न कि हर क्रिया के नीचे एक सामान्य मन्त्र चिपकाया जाए। गोरखपुर मन्दिर की प्रकाशित प्रार्थना में “ऊँ शिव गोरक्ष योगी” है; वेबसाइट के शीर्ष पर “ऊँ नमो भगवते गोरक्षनाथाय” भी है। ये प्रमाणित सार्वजनिक भक्ति-शब्द हैं, पर वेबसाइट इनमें से किसी को धूनी जलाने, सँभालने, ईंधन देने, अंगारे हिलाने, समाप्त करने अथवा राख बाँटने का अलग अनिवार्य मन्त्र नहीं बताती। 8

एक विशिष्ट नाथ गुरु भी पहले मन्त्र और छोटे “शिव गोरक्ष” रूप को प्रकाशित करते हैं; उनकी अन्य तकनीकी साधनाएँ यहाँ नहीं अपनाई जातीं। मन्दिर की प्रार्थना के अन्त में सम्मानसूचक नाथ अभिवादन “आदेश! आदेश!” आता है। इन छोटे उद्धरणों को यहाँ अग्निरहित अध्ययन-सन्दर्भ में रखा गया है, किसी कल्पित अग्नि-विधि का क्रम नहीं बनाया गया। 89

दर्शनार्थियों की मर्यादा और मठ से क्या पूछें

धूनी किसी प्रतिष्ठित, सीमित-प्रवेश, सक्रिय या घिरे हुए क्षेत्र में हो सकती है। इसलिए उस स्थल की मर्यादा स्थानीय संस्था निर्धारित करती है। पहले पूछें कि कौन प्रवेश कर सकता है, कहाँ खड़ा होना उचित है, चित्र लेना स्वीकार्य है या नहीं, धुआँ-संवेदनशील व्यक्ति कहाँ रहें और विभूति वितरण की क्या व्यवस्था है। केवल दान देने, दर्शनार्थी होने या निजी मन्त्र जानने से पवित्र अग्नि सँभालने का अधिकार नहीं मिल जाता। 32

सेवक की वैध सलाह में भी अग्नि-सुरक्षा और स्थानीय नियमों का पालन आवश्यक है; यदि कोई क्रिया नियमों के विरुद्ध हो, तो उसे न करें। पवित्र स्थल के प्रति सम्मान में बच्चों, श्वसन-समस्या वाले व्यक्तियों, पशुओं और पड़ोसियों की सुरक्षा भी आती है। कचरा या प्लास्टिक न जलाएँ और प्रदर्शन के लिए आग से जोखिम न पैदा करें। 7614

धुआँ, ताप, पर्यावरण और वास्तविक सुरक्षा

लकड़ी या जैविक ईंधन की कोई भी सक्रिय अग्नि ताप, चिंगारी, सूक्ष्म कण और अन्य दहन-प्रदूषक उत्पन्न कर सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के तथ्य घरेलू दहन-धुएँ पर व्यापक प्रमाण देते हैं; वे किसी विशेष नाथ धूनी की जोखिम-मात्रा नहीं मापते। अमेरिकी अग्निशमन प्रशासन तथा पर्यावरण संरक्षण एजेंसी खुले अग्नि-स्रोत, बच्चों और ज्वलनशील वस्तुओं के सम्बन्ध में सामान्य सावधानियाँ बताते हैं। उचित सन्देश सावधानी है, यह दावा नहीं कि धार्मिक अग्नि अपने-आप धुएँ से सुरक्षित होती है। 7614

कोई धार्मिक लेख किसी फ्लैट, बालकनी, आँगन, वन-सीमा या भीड़भाड़ वाले मन्दिर क्षेत्र को स्वतः अग्नि के लिए सुरक्षित घोषित नहीं कर सकता। स्थानीय नियम, आपात तैयारी और अधिकृत स्थल-प्रशासन का निर्णय आवश्यक है। इस शैक्षिक अध्ययन में धूनी के आकार, अग्नि जलाने, ईंधन बढ़ाने, लगातार सँभालने, रसायन डालने, फूँकने अथवा बुझाने का कार्य-क्रम नहीं दिया गया है। 16

उत्सव, क्षेत्र और परम्परागत विविधता

गोरखपुर का मठ नाथ परम्परा का प्रसिद्ध केन्द्र है, किन्तु उसकी संस्थागत दैनिक पूजा सभी नाथ मन्दिरों की एक समान नियम-पुस्तिका नहीं है। ओडिशा के सरकारी मन्दिर-विवरण में गोरक्षनाथ-उपासना के स्थानीय रूप मिलते हैं; उनसे उल्लिखित ओडिशा मन्दिर में धूनी होने का दावा नहीं सिद्ध होता। विदेश की एक दूसरी नाथ संस्था अपने सामुदायिक अग्नि-सन्दर्भ को अलग ढंग से प्रस्तुत करती है। ये अलग-अलग प्रकार के स्रोत हैं, एक-दूसरे की अनुष्ठानिक अनुमति नहीं। ??4

गुरु-पुण्यस्मरण, मेले और शिव-सम्बद्ध उत्सव नाथ भक्ति के अवसर हो सकते हैं, लेकिन धूनी का विशेष कर्म, प्रवेश और तिथि स्थानानुसार बदलते हैं। इस स्थिर लेख में कोई मनगढ़न्त उत्सव-तारीख, मुहूर्त या स्थानीय अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे दावों के लिए स्थान-पुष्टि और अलग से सत्यापित पंचांग-निर्णय चाहिए। 15

अग्नि के बिना नाथ-विचार से जुड़ने का अलग मार्ग

जो व्यक्ति धूनी का अधिकृत संरक्षक नहीं है, वह भी गुरु के अर्थ पर विचार कर सकता है, अनुशासन का अभ्यास समझ सकता है, सार्वजनिक गोरक्षनाथ प्रार्थना पढ़ सकता है और दूसरों की सम्मानपूर्वक सेवा कर सकता है। गोरखपुर की प्रार्थना में मिला छोटा सम्बोधन “ऊँ शिव गोरक्ष योगी” चर्चा या अपनी श्रद्धानुसार शान्त स्मरण का विषय हो सकता है। इससे नाथ धूनी बनती या प्रतिस्थापित नहीं होती, न दीक्षा मिलती है, न किसी संस्थागत कर्म के सम्पन्न होने का दावा होता है। 89

किसी भी सार्वजनिक पूजा-मोड से पहले क्या जाँचना होगा

परम्परा-विशिष्ट विधि सीखने के लिए सम्बन्धित संस्था या योग्य गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक है। यह लेख उनकी प्रशिक्षण-परम्परा या अनुमति का विकल्प नहीं है।

तैयारी और क्रमबद्ध अध्ययन

चरण 1

धूनी और हवन का भेद

अंश का लिंक

बताएँ कि संस्थागत पवित्र अग्नि और आहुति-प्रधान हवन की भूमिका तथा अधिकार अलग हो सकते हैं। नाथ धूनी के स्थान पर हवन-पाठ न लगाएँ।

चरण 2

वास्तविक संस्था या गुरु-परम्परा पहचानें

अंश का लिंक

गोरखपुर मन्दिर और इंटरनेशनल नाथ ऑर्डर दो अलग प्रमाण-सन्दर्भ हैं; किसी से भी निरपेक्ष सार्वत्रिक विधि की अनुमति नहीं मिलती।

चरण 3

गुरु-सम्बन्ध समझें

अंश का लिंक

आदिनाथ, मत्स्येन्द्रनाथ और गोरक्षनाथ की विभिन्न भूमिकाएँ समझें; इतिहास और श्रद्धामूलक कथाएँ अलग रखें।

चरण 4

गोरखपुर के अखण्ड धूना का उल्लेख

अंश का लिंक

मन्दिर की अधिकृत पूजा-पद्धति में श्रीअखण्डधूना की पुजारियों द्वारा धूप-आरती का उल्लेख है। यह सूचना है, अनुसरण योग्य सामान्य घरेलू क्रिया नहीं।

चरण 5

प्रतीक का अर्थ, विधि नहीं

एक नाथ संगठन धूनी को रूपान्तरण और सामुदायिक जीवन का प्रतीक मानता है; उसकी विधि दूसरी परम्पराओं पर न थोपें।

चरण 6

तप और संन्यासी दायित्व

अंश का लिंक

नाथ विवरणों में संन्यासी जीवन के अनुशासन और दायित्वों का वर्णन मिलता है। उन्हें पढ़ने के लिए सामान्य पाठक का तपस्या अपनाना या घर में धूनी रखना आवश्यक नहीं।

चरण 7

दर्शन तथा प्रवेश की मर्यादा पूछें

अंश का लिंक

दर्शनार्थी स्थानीय सेवकों से प्रवेश, चित्र, धुएँ और प्रतिबन्धित क्षेत्रों के बारे में पूछ सकते हैं। आग या उपकरण छूने की अनुमति स्वतः नहीं मिलती।

चरण 8

भस्म-विभूति का अर्थ

अंश का लिंक

भस्म किसी समुदाय का विशिष्ट धार्मिक प्रतीक हो सकती है। बिना अनुमति राख एकत्र, निगलना, साँस में लेना या औषधि के रूप में लगाना उचित नहीं।

चरण 9

छोटी गोरक्ष प्रार्थना का अध्ययन

अंश का लिंक

यह वाक्य गोरखपुर मन्दिर की प्रार्थना तथा एक नाथ गुरु के लेख में प्रकाशित है। यह धूनी प्रज्वलन, ईंधन देने या समापन का मन्त्र नहीं।

अंश का लिंक

मूल पाठ

ऊँ शिव गोरक्ष योगी

रोमन लिप्यंतरण

oṃ shiva goraksha yogeeoṃ śiva gorakṣa yogī

अर्थ

शिव-स्वरूप पूज्य योगी गोरक्षनाथ का स्मरण और सम्मान करने वाला संक्षिप्त सम्बोधन।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 10

मन्दिर का दूसरा सम्बोधन पढ़ें

मन्दिर के शीर्षलेख में भगवान गोरक्षनाथ की वन्दना है। इसे अधिकतम अग्निरहित गुरु-स्मरण का अलग उदाहरण मानें, तकनीकी कर्म की अनिवार्यता नहीं।

अंश का लिंक

मूल पाठ

ऊँ नमो भगवते गोरक्षनाथाय

रोमन लिप्यंतरण

oṃ namo bhagavate gorakshanaathaayaoṃ namo bhagavate gorakṣanāthāya

अर्थ

ॐ। पूज्य भगवान् गोरक्षनाथ को आदरपूर्वक नमस्कार।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 11

आदेश अभिवादन का अर्थ

अंश का लिंक

यह शब्द मन्दिर की प्रकाशित प्रार्थना के अन्त में मिलता है; इसका व्यवहार और अभिप्राय नाथ समुदायों में भिन्न हो सकता है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

आदेश! आदेश!

रोमन लिप्यंतरण

aadesh! aadesh!ādeś! ādeś!

अर्थ

गुरु-उपदेश और नाथ परम्परा के प्रति आदर प्रकट करने वाला अभिवादन; अर्थ परम्परा एवं प्रसंग के अनुसार समझा जाता है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 12

गोरख गुरु वन्दना के पूरे बारह खण्डों का अध्ययन

अंश का लिंक

गोरख गुरु वन्दना के बारह चुने हुए खण्ड अर्थ और उल्लिखित पाठभेद सहित पढ़ें। यह धूनी जलाने की विधि नहीं है।

चरण 13

अग्नि व धुएँ से सुरक्षा

अंश का लिंक

सूक्ष्म कण, चिंगारी, जलन और स्थल के नियमों को समझें; धार्मिक धुएँ को स्वतः निरापद न मानें।

चरण 14

धूनी बनाना अथवा सँभालना अवरुद्ध

अंश का लिंक

प्रज्वलन, निर्माण, ईंधन की मात्रा, राख निकालना, समय-सीमा या बुझाने की कोई विधि स्वीकृत अथवा प्रस्तुत नहीं है।

चरण 15

अग्निरहित स्मरण और धूनी को अलग रखें

बिना लौ गुरु-विचार पढ़ना, मनन करना या शान्त प्रार्थना सम्भव है; इसे सम्पन्न धूनी-अनुष्ठान नहीं कहा जाएगा।

चरण 16

परम्परा-विशेष समापन का प्रमाण शेष

अंश का लिंक

नाथ धूनी के सार्वत्रिक समापन या भस्म-वितरण के मन्त्र सत्यापित नहीं हैं। सामान्य शिव, अग्नि अथवा गुरु सूत्र न जोड़ें।

चरण 17 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 1 का अध्ययन

अंश का लिंक

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

गंगे हर-नर्मदे हर, जटाशङ़्करी हर ऊँ नमो पार्वती पतये हर, बोलिये श्री शम्भू जती गुरु गोरक्षनाथ महाराज की जय, माया स्वरूपी दादा मत्स्येन्द्रनाथ महाराज की जय, नवनाथ चौरासी सिद्धों की जय, भेष भगवान की जय, अटल क्षेत्र की जय, रमतेश्वर महाराज की जय, कदली काल भैरवनाथ जी की जय, पात्र देवता की जय, ज्वाला महामाई की जय, सनातन धर्म की जय, अपने-अपने गुरु महाराज की जय, गौ-ब्राह्मण की जय, बोले साचे दरबार की जय, हर हर महादेव की जय।

रोमन लिप्यंतरण

Gange har-Narmade har, jatashankari har, un namo Parvati pataye har, Boliye Shri Shambhu jati Guru Gorakshanath Maharaj ki jai, maya svarupi Dada Matsyendranath Maharaj ki jai, Navnath chaurasi siddhon ki jai, bhesh Bhagavan ki jai, atal kshetra ki jai, Ramteshvar Maharaj ki jai, Kadali Kal Bhairavnath ji ki jai, patra devata ki jai, Jwala Mahamai ki jai, Sanatan Dharm ki jai, apne-apne Guru Maharaj ki jai, gau-brahman ki jai, bole sache darbar ki jai, Har Har Mahadev ki jai.Gange har-Narmade har, jatashankari har, un namo Parvati pataye har, Boliye Shri Shambhu jati Guru Gorakshanath Maharaj ki jai, maya svarupi Dada Matsyendranath Maharaj ki jai, Navnath chaurasi siddhon ki jai, bhesh Bhagavan ki jai, atal kshetra ki jai, Ramteshvar Maharaj ki jai, Kadali Kal Bhairavnath ji ki jai, patra devata ki jai, Jvālā Mahamai ki jai, Sanatan Dharm ki jai, apne-apne Guru Maharaj ki jai, gau-brahman ki jai, bole sache darbar ki jai, Har Har Mahadev ki jai.

अर्थ

समुदाय गंगा-नर्मदा और पार्वतीपति शिव का स्मरण करता है; फिर गोरक्षनाथ, मत्स्येन्द्रनाथ, नवनाथ, चौरासी सिद्ध, अन्य पूज्य नाथ-परम्परा-पुरुषों, गुरुओं और महादेव के जयघोष करता है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 18 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 2 का अध्ययन

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मूल पाठ

कपूर्रगौरम् करुणावतारम् संसारसारम् भुजगेन्द्र हारम्। सदा वसन्तम् हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितम् नमामि।।

रोमन लिप्यंतरण

kapoorragauram karunaavataaram samsaarasaaram bhujagendra haaram| sadaa vasantam hridayaaravinde bhavam bhavaanee sahitam namaami||kapūrragauram karuṇāvatāram saṃsārasāram bhujagendra hāram | sadā vasantam hṛdayāravinde bhavaṃ bhavānī sahitam namāmi ||

अर्थ

मैं भवानी सहित भगवान भव को प्रणाम करता हूँ—जो कपूर की तरह गौर, करुणामय, जगत् के सार तथा नागराज को हार रूप में धारण करने वाले हैं और हृदय-कमल में वास करने वाले माने जाते हैं।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 19 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 3 का अध्ययन

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मूल पाठ

मन्दारमाला कलिनाल कायै कपालमालाङि़्कत कन्थराय। दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय, नमः शिवायै च नमः शिवाय

रोमन लिप्यंतरण

mandaaramaalaa kalinaala kaayai kapaalamaalaani़kata kantharaaya| divyaambaraayai cha digambaraaya, namah shivaayai cha namah Shivayamandāramālā kalināla kāyai kapālamālāṅikat kantharāya | divyāmbarāyai ca digambarāya, namaḥ śivāyai ca namaḥ śivāya

अर्थ

मन्दार-मालाधारी तथा दिव्य वस्त्रों से सुशोभित शिवा (पार्वती) और कपालमाला तथा दिगम्बर रूप वाले शिव को नमस्कार है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 20 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 4 का अध्ययन

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

गोरक्ष बालम् गुरु शिष्य पालम् शेषांहिमालम् शशिखण्ड भालम्। कालस्य कालम् जितजन्म जालम् वन्दे जटालम जगदब्जनालम्।।

रोमन लिप्यंतरण

Goraksh baalam Guru shishya paalam sheshaamhimaalam shashikhanda bhaalam| kaalasya kaalam jitajanma jaalam vande jataalama jagadabjanaalam||gorakṣa bālam guru śiṣya pālam śeṣāṃhimālam śaśikhaṇḍa bhālam | kālasya kālam jitajanma jālam vande jaṭālam jagadabjanālam ||

अर्थ

गुरु-शिष्य परम्परा के पालक, चन्द्रकलायुक्त ललाट वाले, जटाधारी तथा काल और जन्म-जाल से परे वर्णित गोरक्षनाथ को मैं प्रणाम करता हूँ। दो कठिन समासों का अर्थ अभी अनिश्चित है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 21 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 5 का अध्ययन

अंश का लिंक

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर! गुरुः साक्षात्परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवै नमः।।

रोमन लिप्यंतरण

gururbrahmaa gururvishnu gururdevo maheshvara! guruh saakshaatparabrahma, tasmai Shri guravai namah||gururbrahmā gururviṣṇu gururdevo maheśvara! guruḥ sākṣātparabrahma, tasmai śrī guravai namaḥ ||

अर्थ

गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर के प्रतीकों से स्तुत करके परम सत्य का बोध कराने वाले पूज्य शिक्षक के रूप में नमस्कार किया गया है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 22 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 6 का अध्ययन

अंश का लिंक

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः, पूजा मूलं गुरोः पदम् मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्ष मूलं गुरोः कृपा

रोमन लिप्यंतरण

dhyaanamoolam gurormoortih, Puja moolam guroh padam mantramoolam gurorvaakyam Moksha moolam guroh kripaadhyānamūlaṃ gurormūrtiḥ, pūjā mūlaṃ guroḥ padam mantramūlaṃ gurorvākyaṃ mokṣa mūlaṃ guroḥ kṛpā

अर्थ

गुरु का रूप ध्यान का आधार, चरण पूजा का आधार, वाणी मार्गदर्शन का आधार और कृपा मोक्ष का मूल मानी गई है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 23 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 7 का अध्ययन

अंश का लिंक

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

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मूल पाठ

मन्त्र सत्यं पूजा सत्यं सत्यदेव निरन्जनम् गुरुवाक्यं सदा सत्यं सत्यमेकम् परंपदम्

रोमन लिप्यंतरण

Mantra satyam Puja satyam satyadeva niranjanam guruvaakyam sadaa satyam satyamekam parampadammantra satyaṃ pūjā satyaṃ satyadeva nirañjanam guruvākyaṃ sadā satyaṃ satyamekam paraṃpadam

अर्थ

यह खण्ड मन्त्र, पूजा और गुरु के वचन में सत्य का महत्त्व दोहराता है तथा एक परम सत्य की ओर संकेत करता है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 24 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 8 का अध्ययन

अंश का लिंक

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

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मूल पाठ

त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविड़म् त्वमेव त्वमेव सर्वम् मम देव देव!

रोमन लिप्यंतरण

tvameva maataa cha pitaa tvameva tvameva bandhushcha sakhaa tvameva| tvameva vidyaa draviḏam tvameva tvameva sarvam mama deva deva!tvameva mātā ca pitā tvameva tvameva bandhuśca sakhā tvameva | tvameva vidyā draviṛam tvameva tvameva sarvam mama deva deva!

अर्थ

हे देवदेव! आप ही माता-पिता, बन्धु-मित्र, विद्या और धन-संपदा का आधार तथा मेरे लिए सब कुछ हैं। तीसरी पंक्ति का प्रदत्त शब्द अस्पष्ट है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 25 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 9 का अध्ययन

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

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मूल पाठ

आकाशे ताडका लिंगम पाताले वटुकेश्वरम् मर्त्ये लोके महाकालम् सर्व लिंगम नमोस्तुते।।

रोमन लिप्यंतरण

aakaashe taadakaa limgama paataale vatukeshvaram martye loke mahaakaalam sarva limgama namostute||ākāśe tāḍakā liṅgam pātāle vaṭukeśvaram martye loke mahākālam sarva liṅgam namostute ||

अर्थ

प्रार्थना आकाश, पाताल और मृत्युलोक से सम्बद्ध शिवलिङ्ग स्वरूपों—महाकाल सहित—को प्रणाम करती है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 26 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 10 का अध्ययन

अंश का लिंक

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

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मूल पाठ

शेली श्रृंगी शिर जटा झोली भगवा भेष, कानन कुण्डल भस्म लसै, शिव गोरक्ष आदेश।।

रोमन लिप्यंतरण

Sheli shringi shir jata jholi bhagva bhesh, Kanan kundal bhasm lasai, Shiv Goraksh Aadesh.Sheli shringi shir jata jholi bhagva bhesh, Kanan kundal bhasm lasai, Shiv Goraksh Aadesh.

अर्थ

श्रृंगी, जटाएँ, भगवा भेष, कानों के कुण्डल और भस्मधारी नाथयोगी की छवि प्रस्तुत करके “शिव गोरक्ष आदेश” कहा गया है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 27 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 11 का अध्ययन

अंश का लिंक

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

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मूल पाठ

ऊँकार तेरा आधार तीन लोक में जय-जयकार। नाद बाजे काल भागे, ज्ञान की टोपी, गोरख साजे गले नाद, पुष्पन की माला रक्षा करें, श्री शम्भुजति गुरु गोरक्षनाथ जी बाला।।

रोमन लिप्यंतरण

Unkar tera adhar Tin lok men jai-jaikar. Nad baje kal bhage, Gyan ki topi, Gorakh saje Gale nad, pushpan ki mala Raksha karen, Shri Shambhujati Guru Gorakshanath ji bala.Unkar tera adhar Tin lok men jai-jaikar. Nad baje kal bhage, Gyan ki topi, Gorakh saje Gale nad, pushpan ki mala Raksha karen, Shri Shambhujati Guru Gorakshanath ji bala.

अर्थ

ओंकार को आधार मानकर तीनों लोकों में उसकी जयध्वनि की जाती है। नाद, ज्ञान की टोपी, माला और गोरक्षनाथ की रक्षा-प्रार्थना से नाथ-वेश तथा भक्ति की छवि उभरती है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 28 · वैकल्पिक

वन्दना खण्ड 12 का अध्ययन

अंश का लिंक

पूरा पाठ और उसका अर्थ पढ़ें, संदिग्ध पाठभेद पहचानें; यह खण्ड किसी अग्नि-क्रिया से नहीं जोड़ा गया है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

चार खाणी चार बानी चन्द्र सूर्य पवन पानी एको देवा सर्वत्र सेवा ज्योति पाटले परसो देवा कानन कुण्डल गले नाद करो सिद्धो नाद्कार सिद्ध गुरुवरों को आदेश! आदेश!!

रोमन लिप्यंतरण

Char khani char bani Chandra surya pavan pani Eko deva sarvatra seva Jyoti patale parso deva Kanan kundal gale nad Karo siddho nadkar Siddh guruvaron ko Aadesh! Aadesh!!Char khani char bani Chandra surya pavan pani Eko deva sarvatra seva Jyoti patale parso deva Kanan kundal gale nad Karo siddho nadkar Siddh guruvaron ko Aadesh! Aadesh!!

अर्थ

समापन में चार खाणी, चार वाणी, चन्द्र-सूर्य, पवन-पानी और एक दैवी तत्त्व का स्मरण करके सिद्ध गुरुओं को “आदेश! आदेश!!” कहा जाता है।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 29 · वैकल्पिक

स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 1

अंश का लिंक

इस प्रमाणित छोटे वचन का उसके भक्तिपरक या गुरु-विशिष्ट प्रसंग में अध्ययन करें; यह धूनी-विधि नहीं है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

ॐ शिव गोरक्ष योगी

रोमन लिप्यंतरण

oṃ shiva goraksha yogeeoṃ śiva gorakṣa yogī

अर्थ

शिव से सम्बद्ध योगी गोरक्षनाथ का संक्षिप्त भक्तिपूर्ण स्मरण।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 30 · वैकल्पिक

स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 2

इस प्रमाणित छोटे वचन का उसके भक्तिपरक या गुरु-विशिष्ट प्रसंग में अध्ययन करें; यह धूनी-विधि नहीं है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

ॐ नमो भगवते गोरक्षनाथाय

रोमन लिप्यंतरण

oṃ namo bhagavate gorakshanaathaayaoṃ namo bhagavate gorakṣanāthāya

अर्थ

भगवान् गोरक्षनाथ को आदरपूर्वक नमस्कार।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 31 · वैकल्पिक

स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 3

अंश का लिंक

इस प्रमाणित छोटे वचन का उसके भक्तिपरक या गुरु-विशिष्ट प्रसंग में अध्ययन करें; यह धूनी-विधि नहीं है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

आदेश! आदेश!

रोमन लिप्यंतरण

aadesh! aadesh!ādeś! ādeś!

अर्थ

गुरु-वाणी और नाथ-परम्परा के सम्मान का अभिवादन—आदेश!

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 32 · वैकल्पिक

स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 4

अंश का लिंक

इस प्रमाणित छोटे वचन का उसके भक्तिपरक या गुरु-विशिष्ट प्रसंग में अध्ययन करें; यह धूनी-विधि नहीं है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

शिव गोरक्ष

रोमन लिप्यंतरण

shiva gorakshaśiva gorakṣa

अर्थ

नाथ गुरु-सम्बद्ध स्रोत में प्रमाणित छोटा शिव-गोरक्ष सम्बोधन।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 33 · वैकल्पिक

स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 5

अंश का लिंक

इस प्रमाणित छोटे वचन का उसके भक्तिपरक या गुरु-विशिष्ट प्रसंग में अध्ययन करें; यह धूनी-विधि नहीं है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

अलख निरंजन

रोमन लिप्यंतरण

alakh niranjanalakh nirañjan

अर्थ

अलक्ष्य और निरञ्जन परम तत्त्व का स्मरण; धूनी की किसी अग्नि-क्रिया का प्रमाणित निर्देश नहीं।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 34 · वैकल्पिक

नाथ गुरु-सम्बद्ध आचमन सूत्र 1 (केवल अध्ययन)

अंश का लिंक

इस प्रमाणित छोटे वचन का उसके भक्तिपरक या गुरु-विशिष्ट प्रसंग में अध्ययन करें; यह धूनी-विधि नहीं है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

ॐ सत नमो आदेश

रोमन लिप्यंतरण

oṃ sat namo aadeshoṃ sat namo ādeś

अर्थ

सत् के प्रति नमस्कार और आदेश का आदर।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 35 · वैकल्पिक

नाथ गुरु-सम्बद्ध आचमन सूत्र 2 (केवल अध्ययन)

इस प्रमाणित छोटे वचन का उसके भक्तिपरक या गुरु-विशिष्ट प्रसंग में अध्ययन करें; यह धूनी-विधि नहीं है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

ॐ गुरूजी को आदेश

रोमन लिप्यंतरण

oṃ guroojee ko aadeshoṃ gurūjī ko ādeś

अर्थ

गुरुजी और उनके आदेश का श्रद्धापूर्वक स्मरण।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

चरण 36 · वैकल्पिक

नाथ गुरु-सम्बद्ध आचमन सूत्र 3 (केवल अध्ययन)

अंश का लिंक

इस प्रमाणित छोटे वचन का उसके भक्तिपरक या गुरु-विशिष्ट प्रसंग में अध्ययन करें; यह धूनी-विधि नहीं है।

अंश का लिंक

मूल पाठ

ॐ सद्गुरुजी, नाथ जी गुरूजी को आदेश

रोमन लिप्यंतरण

oṃ sadgurujee, naath jee guroojee ko aadeshoṃ sadgurujī, nāth jī gurūjī ko ādeś

अर्थ

सद्गुरु, नाथ और गुरु-परम्परा के आदेश को नमन।

सम्बन्धित पाठ और स्रोत

प्रसंग 37

धूप-वासन मन्त्र

अंश का लिंक

कुछ नाथ पूजा-परम्पराओं में धूप की प्रार्थनाएँ आती हैं। धूप से जुड़ा पाठ अपने-आप अखण्ड धूनी बनाए रखने की क्रियाविधि नहीं बन जाता।

प्रसंग 38

ज्योति बीज मन्त्र

अंश का लिंक

ज्योति का सम्बन्ध दीपक और ध्यान के प्रकाश—दोनों से हो सकता है। इन अर्थों को धूनी प्रज्वलित करने की सार्वभौम विधि न समझें।

प्रसंग 39

चिमटा सम्बन्धी मन्त्र

अंश का लिंक

चिमटा कुछ नाथ अनुष्ठान-परिसरों से जुड़ा है। उससे सम्बन्धित प्रार्थना उपकरण, ज्वाला या अंगारे सँभालने का प्रशिक्षण या अनुमति नहीं देती।

प्रसंग 40

डमरू / नाद मन्त्र

डमरू की प्रार्थनाएँ वाद्य और पवित्र ध्वनि से सम्बन्धित हैं। उनका सांस्कृतिक अर्थ ईंधन, राख और अग्नि-संचालन की विधि से अलग है।

महत्त्वपूर्ण सावधानियाँ

इस मार्गदर्शिका से घर में धूनी न बनाएँ। आग का संचालन, घर का धुआँ, जलने का जोखिम और स्थानीय नियम सक्षम स्थल-विशेष जाँच माँगते हैं। मन्दिर या इंटरनेट के चित्र देखकर अग्नि-कर्म की नकल न करें। सार्वजनिक प्रार्थना से उन्नत साधना की अनुमति नहीं मिलती। 17614

सम्पूर्ण धूनी-विधि, अग्नि सँभालने का अधिकार, परम्परा की स्वीकृति तथा आरम्भ/समापन के विशिष्ट मन्त्र सत्यापित नहीं हैं। इसलिए यह अनुष्ठान चलाने योग्य नहीं और इसे सक्रिय निर्देशित अनुष्ठान नहीं दिखाया जाएगा। भविष्य में परम्परा, अग्नि-सुरक्षा, भाषा तथा अधिकार की स्वतंत्र स्वीकृति चाहिए। 1

प्रश्न और आगे का अध्ययन

सामान्य प्रश्न

क्या घर में धूनी रख सकते हैं?

इस लेख से सामान्य अनुमति नहीं मिलती। संस्था-विशेष की स्वीकृति, अग्नि-सुरक्षा की जाँच और स्थानीय नियम आवश्यक होंगे। छोटी प्रार्थना धूनी का विकल्प या सम्पन्न अनुष्ठान नहीं है। 16

क्या धूनी और हवन एक हैं?

नहीं। हवन एक निर्धारित आहुति-विधि है; धूनी निरन्तर साधु-सम्बद्ध पवित्र स्थल हो सकती है। कुछ समुदायों में धूनी पर अर्पण हो सकते हैं, लेकिन इससे दोनों परम्पराएँ एक नहीं हो जातीं। 34

क्या गुरु आवश्यक हैं?

परम्परा-निर्भर या तकनीकी धूनी-कर्म के लिए गुरु-मार्गदर्शन और संस्थागत अनुमति महत्त्वपूर्ण है। नाथ इतिहास को सामान्य रूप में पढ़ने के लिए स्वयं को दीक्षित बताने की आवश्यकता नहीं। 29

क्या ॐ शिव गोरक्ष योगी धूनी जलाने का मन्त्र है?

यह सार्वजनिक गोरक्ष-सम्बोधन के रूप में प्रमाणित है, पर जाँचे गए स्रोत इसे धूनी में आग से जुड़ी हर क्रिया का सार्वत्रिक मन्त्र नहीं कहते। इसके आधार पर कोई अलग अग्नि-मन्त्र गढ़ा नहीं गया है। 89

क्या हर राख विभूति होती है?

नहीं। राख की धार्मिक मान्यता, उसका स्रोत और वितरण परम्परा के अनुसार निर्धारित होता है। साधारण आग की राख स्वतः पवित्र प्रमाणित नहीं होती; उसका सेवन या चिकित्सा में उपयोग नहीं करना चाहिए। 47

क्या गोरखपुर की पद्धति सभी नाथों के लिए समान है?

नहीं। मन्दिर का वर्णन उसकी अपनी पुजारी-व्यवस्था का है। नाथ मठों, संन्यासी समुदायों और क्षेत्रीय तीर्थों में विविधता है; विदेश का एक संगठन अलग अग्नि-प्रतीकात्मक विवरण देता है। 324

क्या चित्र लेना या राख छूना ठीक है?

प्रतिबन्धित स्थान में जाने, चित्र लेने या विभूति लेने से पहले वास्तविक सेवक/प्रबंधक से अनुमति पूछें। गरम क्षेत्र में न जाएँ और कार्यरत सेवकों में बाधा न डालें। 36

क्या धुआँ वायु शुद्ध करता या रोग ठीक करता है?

यहाँ ऐसे चिकित्सीय या पर्यावरणीय लाभ का प्रमाण नहीं है। जैविक ईंधन जलाने से हानिकारक प्रदूषक बन सकते हैं; आध्यात्मिक शुद्धि की धारणा और मापी गई वायु-गुणवत्ता अलग प्रश्न हैं। 714

क्या अग्नि जलाए बिना इसका अध्ययन कर सकता हूँ?

हाँ। इतिहास पढ़ें, सम्मानजनक शब्दावली सीखें, सार्वजनिक प्रार्थना समझें और आचरण पर विचार करें। यह educational guide है, सम्पन्न धूनी पूजा-मोड नहीं। 18

सम्बन्धित शिवगोरक्ष सामग्री

सम्बन्धित मार्गदर्शिका: घरेलू हवन और होम (सरल घरेलू हवन/होम) अलग कर्म-सन्दर्भ को समझाती है और उसमें भी अग्नि-क्रियाओं पर रोक है। यह सम्बन्ध केवल तुलना के लिए है।

संस्करण का मूल रोमन पाठ

इस संस्करण में दिया गया रोमन पाठ, सरल रोमन प्रदर्शन से पहले की वर्तनी और शब्द-रूपों सहित।

  1. छोटी गोरक्ष प्रार्थना का अध्ययन

    oṃ śiva gorakṣa yogī

  2. मन्दिर का दूसरा सम्बोधन पढ़ें

    oṃ namo bhagavate gorakṣanāthāya

  3. आदेश अभिवादन का अर्थ

    ādeś! ādeś!

  4. वन्दना खण्ड 1 का अध्ययन

    Gange har-Narmade har, jatashankari har, un namo Parvati pataye har, Boliye Shri Shambhu jati Guru Gorakshanath Maharaj ki jai, maya svarupi Dada Matsyendranath Maharaj ki jai, Navnath chaurasi siddhon ki jai, bhesh Bhagavan ki jai, atal kshetra ki jai, Ramteshvar Maharaj ki jai, Kadali Kal Bhairavnath ji ki jai, patra devata ki jai, Jvālā Mahamai ki jai, Sanatan Dharm ki jai, apne-apne Guru Maharaj ki jai, gau-brahman ki jai, bole sache darbar ki jai, Har Har Mahadev ki jai.

  5. वन्दना खण्ड 2 का अध्ययन

    kapūrragauram karuṇāvatāram saṃsārasāram bhujagendra hāram | sadā vasantam hṛdayāravinde bhavaṃ bhavānī sahitam namāmi ||

  6. वन्दना खण्ड 3 का अध्ययन

    mandāramālā kalināla kāyai kapālamālāṅikat kantharāya | divyāmbarāyai ca digambarāya, namaḥ śivāyai ca namaḥ śivāya

  7. वन्दना खण्ड 4 का अध्ययन

    gorakṣa bālam guru śiṣya pālam śeṣāṃhimālam śaśikhaṇḍa bhālam | kālasya kālam jitajanma jālam vande jaṭālam jagadabjanālam ||

  8. वन्दना खण्ड 5 का अध्ययन

    gururbrahmā gururviṣṇu gururdevo maheśvara! guruḥ sākṣātparabrahma, tasmai śrī guravai namaḥ ||

  9. वन्दना खण्ड 6 का अध्ययन

    dhyānamūlaṃ gurormūrtiḥ, pūjā mūlaṃ guroḥ padam mantramūlaṃ gurorvākyaṃ mokṣa mūlaṃ guroḥ kṛpā

  10. वन्दना खण्ड 7 का अध्ययन

    mantra satyaṃ pūjā satyaṃ satyadeva nirañjanam guruvākyaṃ sadā satyaṃ satyamekam paraṃpadam

  11. वन्दना खण्ड 8 का अध्ययन

    tvameva mātā ca pitā tvameva tvameva bandhuśca sakhā tvameva | tvameva vidyā draviṛam tvameva tvameva sarvam mama deva deva!

  12. वन्दना खण्ड 9 का अध्ययन

    ākāśe tāḍakā liṅgam pātāle vaṭukeśvaram martye loke mahākālam sarva liṅgam namostute ||

  13. वन्दना खण्ड 10 का अध्ययन

    Sheli shringi shir jata jholi bhagva bhesh, Kanan kundal bhasm lasai, Shiv Goraksh Aadesh.

  14. वन्दना खण्ड 11 का अध्ययन

    Unkar tera adhar Tin lok men jai-jaikar. Nad baje kal bhage, Gyan ki topi, Gorakh saje Gale nad, pushpan ki mala Raksha karen, Shri Shambhujati Guru Gorakshanath ji bala.

  15. वन्दना खण्ड 12 का अध्ययन

    Char khani char bani Chandra surya pavan pani Eko deva sarvatra seva Jyoti patale parso deva Kanan kundal gale nad Karo siddho nadkar Siddh guruvaron ko Aadesh! Aadesh!!

  16. स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 1

    oṃ śiva gorakṣa yogī

  17. स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 2

    oṃ namo bhagavate gorakṣanāthāya

  18. स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 3

    ādeś! ādeś!

  19. स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 4

    śiva gorakṣa

  20. स्वतंत्र संक्षिप्त सार्वजनिक सम्बोधन 5

    alakh nirañjan

  21. नाथ गुरु-सम्बद्ध आचमन सूत्र 1 (केवल अध्ययन)

    oṃ sat namo ādeś

  22. नाथ गुरु-सम्बद्ध आचमन सूत्र 2 (केवल अध्ययन)

    oṃ gurūjī ko ādeś

  23. नाथ गुरु-सम्बद्ध आचमन सूत्र 3 (केवल अध्ययन)

    oṃ sadgurujī, nāth jī gurūjī ko ādeś

पुनर्प्रयुक्त पाठों का श्रेय और लाइसेंस
पाठ और स्रोत

Source presentation of a short Nath salutation: Guru Yogi Matsyendranath Maharaj, Nathas Tradition, https://nathas.org/en/tradition/material/short-practice-of-goraksha-mantra/. The page expressly allows use of site content with a mandatory reference. Only the selected short prayer words are used; supplied Om orthography is retained. No English translation, breathing technique, nyasa, water-drinking protocol or full practice arrangement is reproduced. ShivGoraksh meanings and explanations are separate educational writing; no initiation or ritual authority is conferred.

लाइसेंस
पाठ और स्रोत

Inherited brief Gorakshnath namaskara formula, with the supplied Om spelling retained. Shri Gorakhnath Mandir public prayer heading is a contemporary witness: https://www.gorakhnathmandir.in/prarthana.aspx. This assessment covers the brief salutation, not the temple's complete prayer arrangement, website prose or images. It is not a grant of rights over the website or ritual authorization.

पाठ और स्रोत

Underlying lyric permission confirmed by the founder; supporting document not independently inspected. ShivGoraksh edited educational presentation and original bilingual meanings. No recording or music included. The quoted passage is used for textual study, without conferring ritual authority.

पाठ और स्रोत

Inherited traditional wording; selected witness cited below. Romanization, meanings and explanations prepared for ShivGoraksh. No modern source translation, page layout or recording reproduced. The quoted passage is used for textual study, without conferring ritual authority.

पाठ और स्रोत

Inherited brief Gorakshnath namaskara formula, with the supplied Om spelling retained. Shri Gorakhnath Mandir public prayer heading is a contemporary witness: https://www.gorakhnathmandir.in/prarthana.aspx. This assessment covers the brief salutation, not the temple's complete prayer arrangement, website prose or images. It is not a grant of rights over the website or ritual authorization.

पाठ और स्रोत

New AI-assisted ShivGoraksh devotional composition, expressly authorized by the founder. Forty new devotional couplets and opening/closing verses; not a historical Bhairav Chalisa, lineage instruction or independently reviewed metrical edition. Bilingual meanings, explanations and orthographic Roman rendering prepared with AI assistance. Prosodic and specialist review pending; no historical authenticity claimed. The quoted passage is used for textual study, without conferring ritual authority.

पाठ और स्रोत

Underlying lyric permission confirmed by the founder; supporting document not independently inspected. ShivGoraksh edited educational presentation and original bilingual meanings. No recording or music included. The quoted passage is used for textual study, without conferring ritual authority.

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Source presentation of a short Nath salutation: Guru Yogi Matsyendranath Maharaj, Nathas Tradition, https://nathas.org/en/tradition/material/short-practice-of-goraksha-mantra/. The page expressly allows use of site content with a mandatory reference. Only the selected short prayer words are used; supplied Om orthography is retained. No English translation, breathing technique, nyasa, water-drinking protocol or full practice arrangement is reproduced. ShivGoraksh meanings and explanations are separate educational writing; no initiation or ritual authority is conferred.

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लाइसेंस
संदर्भ और स्रोत (21)

यह स्रोत-सूची लेख के साथ दी गई है। स्रोत का लिंक स्वतंत्र पाठ-सत्यापन या पुनः उपयोग अनुमति का प्रमाण नहीं है।

  1. ShivGoraksh — Puja & Practice Master Curriculum, Edition 1.0
  2. पूजा-पद्धति (Pūjā-paddhati)

    स्रोत खोलें 2

  3. प्रार्थना (Prārthanā)

    स्रोत खोलें 3

  4. गोरखनाथ-मंदिर, गोरखपुर — इतिहास

    स्रोत खोलें 4

  5. A Survey of Current Researches on India’s Nāth Yogīs

    स्रोत खोलें 5

  6. Dhuni — Definition and Significance

    स्रोत खोलें 6

  7. Short practice of Gorakhnath-mantra

    स्रोत खोलें 7

  8. Yogic Identities: Tradition and Transformation

    स्रोत खोलें 8

  9. Gorakhnath Temple — District Gorakhpur

    स्रोत खोलें 9

  10. Household air pollution

    स्रोत खोलें 10

  11. Outdoor Fire Safety

    स्रोत खोलें 11

  12. Backyard recreational fires

    स्रोत खोलें 12

  13. — Gorakh Guru Vandana, ShivGoraksh Edited V2
  14. — Gorakshnath Shabar Mantra
  15. Gorakhnath Temple, Jagatsinghpur — Odisha Hindu Religious Endowment

    स्रोत खोलें 15

  16. Nathas Prayer

    स्रोत खोलें 16

  17. Items of sadhana

    स्रोत खोलें 17

  18. — ShivGoraksh Edited V2, user-supplied composite Nath Guru Vandana
  19. Monastic Wanderers: Nāth Yogī Ascetics in Modern South Asia

    स्रोत खोलें 19

  20. Sources of Indoor Particulate Matter (PM)

    स्रोत खोलें 20

  21. Awakening the Nath Dhuni

    स्रोत खोलें 21

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