पढ़ने की सहायता

सरल रोमन संस्कृत के लिए देवनागरी-आधारित पठन-सहायता है। IAST में शास्त्रीय लिप्यंतरण के भेद सुरक्षित हैं। जहाँ दिया हुआ रोमन पाठ नहीं है, वहाँ IAST देवनागरी से स्वतः बनाया गया है; यह प्रमाणित उच्चारण-निर्देश नहीं है। हिन्दी और अन्य लोकभाषा के गीतों में दिए गए शब्द और बोलचाल के स्वरान्त सुरक्षित रहते हैं; सरल रोमन स्पष्ट लिप्यंतरण-चिह्नों को सुलभ बनाता है। उनके शास्त्रीय दृश्य में दिया हुआ रोमन पाठ रहता है, संस्कृत उच्चारण नहीं गढ़ा जाता। बीजाक्षरों का चुना हुआ रोमन रूप जहाँ स्पष्ट है, सुरक्षित रखा गया है।

मन्त्र और जप

नवार्ण / नवाक्षरी मन्त्र — ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

तीन बीजाक्षरों से युक्त चामुण्डा देवी का प्रसिद्ध शाक्त मन्त्र; अर्थ-पाठ, अनुष्ठान-निर्देश नहीं।

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पाठ, अर्थ और व्याख्या

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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

अर्थ

यह देवी चामुण्डा का मन्त्र-आह्वान है, जिसमें ॐ, ऐं, ह्रीं और क्लीं जैसे बीजाक्षर तथा पारम्परिक अन्त्यपद ‘विच्चे’ आते हैं। यह सामान्य संस्कृत गद्य-वाक्य नहीं है; इसलिए इसके प्रत्येक अंश का निश्चित शब्दशः हिन्दी अनुवाद बताना सही नहीं होगा।

व्याख्या

चुने हुए समकालीन पाठ में मन्त्र का आरम्भ ‘ॐ’ से होता है। अगले तीन बीजाक्षर देवी की दिव्य शक्ति के विविध रूपों के संकेत माने जाते हैं, लेकिन साधारण शब्दकोश के शब्द नहीं हैं। नवार्ण-विधि के एक पाठ में ऐं को ‘बीज’, ह्रीं को ‘शक्ति’ और क्लीं को ‘कीलक’ कहा गया है। ये परम्परागत तकनीकी वर्गीकरण हैं; हर सम्प्रदाय के लिए एक जैसे शाब्दिक अर्थ नहीं। ‘चामुण्डायै’ देवी चामुण्डा के नाम का चतुर्थी एकवचन रूप है—‘चामुण्डा को/के लिए’। चण्ड और मुण्ड की कथा से देवी का नाम सम्बद्ध है, पर इससे यह पूरा मन्त्र देवीमाहात्म्य के तेरह मुख्य अध्यायों में किसी निश्चित श्लोक-संख्या पर स्थित सिद्ध नहीं होता। ‘विच्चे’ को प्राप्त मन्त्ररूप के अनुरूप यथावत् रखा गया है। इसका अर्थ ‘सभी बाधाएँ काट दो’ या कोई एक निश्चित संस्कृत क्रिया बताना विश्वसनीय रूप से स्थापित नहीं हुआ है। एक अन्य आधुनिक पूजा-पाठ स्रोत प्रणव-रहित पाठ भी दर्ज करता है। नौ-अक्षर के पारम्परिक विश्लेषण में ऐं (१), ह्रीं (१), क्लीं (१), चा-मु-ण्डा-यै (४) और वि-च्चे (२) माने जाते हैं; आरम्भ का ॐ इस नौ की गिनती में अलग है। यह केवल पाठ और अर्थ का शैक्षिक आलेख है। सभी परम्पराओं पर एक ही दीक्षा-नियम लागू है अथवा कोई मर्यादा नहीं है—ऐसा दावा यहाँ नहीं किया गया है।

सन्दर्भ और उपयोग

चयनित मूल पाठ: जाँचे गए आधुनिक स्रोत का ॐ-सहित रूप 1। प्राचीन मुद्रित मूल और साधना-अधिकार की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सम्पूर्ण मूल मन्त्र — देवनागरी

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

यही इस चयन का पूरा संक्षिप्त मन्त्र है। इसे किसी दूसरे श्लोक का आधा भाग मानकर शेष शब्द जोड़ना उचित नहीं। इसी लेख का रोमन IAST पाठ अंग्रेज़ी संस्करण में दिया गया है। ॐ के बिना भी एक अलग प्रचलित रूप दस्तावेज़ में दर्ज है। 1 2 4

सरल हिन्दी अर्थ — बिना बनावटी शब्दशः अनुवाद के

यह देवी चामुण्डा का मन्त्र-आह्वान है, जिसमें ॐ, ऐं, ह्रीं और क्लीं जैसे बीजाक्षर तथा पारम्परिक अन्त्यपद ‘विच्चे’ आते हैं। यह सामान्य संस्कृत गद्य-वाक्य नहीं है; इसलिए इसके प्रत्येक अंश का निश्चित शब्दशः हिन्दी अनुवाद बताना सही नहीं होगा।

‘चामुण्डायै’ का व्याकरणिक अर्थ ‘देवी चामुण्डा को’ है। लेकिन ऐं, ह्रीं और क्लीं जैसे बीजाक्षर साधारण शब्द नहीं; इन्हें परम्पराएँ प्रतीकात्मक ध्वनियों के रूप में समझती हैं। ‘विच्चे’ का भी जाँचे गए स्रोतों से कोई सर्वसम्मत साधारण शब्दार्थ प्रमाणित नहीं होता। इसलिए पूरे मन्त्र का अनुवाद ‘मुझे धन, विजय और रोगमुक्ति दो’ कहना गलत होगा; वे भक्तिपरक अभिलाषाएँ हो सकती हैं, मूल मन्त्र में उपस्थित शब्द नहीं।

एक सम्पूर्ण मन्त्र की विस्तृत व्याख्या

चुने हुए समकालीन पाठ में मन्त्र का आरम्भ ‘ॐ’ से होता है। अगले तीन बीजाक्षर देवी की दिव्य शक्ति के विविध रूपों के संकेत माने जाते हैं, लेकिन साधारण शब्दकोश के शब्द नहीं हैं। नवार्ण-विधि के एक पाठ में ऐं को ‘बीज’, ह्रीं को ‘शक्ति’ और क्लीं को ‘कीलक’ कहा गया है। ये परम्परागत तकनीकी वर्गीकरण हैं; हर सम्प्रदाय के लिए एक जैसे शाब्दिक अर्थ नहीं। ‘चामुण्डायै’ देवी चामुण्डा के नाम का चतुर्थी एकवचन रूप है—‘चामुण्डा को/के लिए’। चण्ड और मुण्ड की कथा से देवी का नाम सम्बद्ध है, पर इससे यह पूरा मन्त्र देवीमाहात्म्य के तेरह मुख्य अध्यायों में किसी निश्चित श्लोक-संख्या पर स्थित सिद्ध नहीं होता। ‘विच्चे’ को प्राप्त मन्त्ररूप के अनुरूप यथावत् रखा गया है। इसका अर्थ ‘सभी बाधाएँ काट दो’ या कोई एक निश्चित संस्कृत क्रिया बताना विश्वसनीय रूप से स्थापित नहीं हुआ है। एक अन्य आधुनिक पूजा-पाठ स्रोत प्रणव-रहित पाठ भी दर्ज करता है। नौ-अक्षर के पारम्परिक विश्लेषण में ऐं (१), ह्रीं (१), क्लीं (१), चा-मु-ण्डा-यै (४) और वि-च्चे (२) माने जाते हैं; आरम्भ का ॐ इस नौ की गिनती में अलग है। यह केवल पाठ और अर्थ का शैक्षिक आलेख है। सभी परम्पराओं पर एक ही दीक्षा-नियम लागू है अथवा कोई मर्यादा नहीं है—ऐसा दावा यहाँ नहीं किया गया है।

छः लिखित अंशों को समझें

अंशअर्थ या परम्परागत संकेतआवश्यक सावधानी
ॐचुने हुए पाठ का प्रारम्भिक पवित्र प्रणव-स्वर।अन्य प्राप्त पाठ में यह उपसर्ग नहीं है; यहाँ नौ-अक्षर की गिनती में इसे अलग रखा गया है।
ऐंशाक्त व्याख्याओं में ज्ञान, वाणी तथा सरस्वती से जोड़ा जाने वाला बीजाक्षर।जाँची गई विधि में ऐं को ‘बीज’ कहा गया है; इसका साधारण शब्दानुवाद नहीं होता।
ह्रींदेवी-शक्ति तथा प्रकट होने की रहस्यमयी प्रक्रिया से जोड़ा जाने वाला शाक्त बीजाक्षर।चुना हुआ विनियोग इसे ‘शक्ति’ कहता है; किस देवी-रूप से जोड़ा जाता है, यह परम्परा के अनुसार भिन्न हो सकता है।
क्लींआकर्षण या दैवी एकत्व जैसी परम्परा-निर्भर धारणाओं से जोड़ा जाने वाला बीजाक्षर।प्राप्त विनियोग में इसे ‘कीलक’ कहा गया है; इससे किसी सार्वभौम अनुष्ठान-विधि का निर्देश नहीं निकलता।
चामुण्डायैदेवी चामुण्डा के नाम का चतुर्थी एकवचन—‘चामुण्डा को/के लिए’।यह व्याकरणिक पहचान अपेक्षाकृत स्पष्ट है; इसमें अलग से कोई सम्पूर्ण निवेदन-वाक्य नहीं है।
विच्चेमन्त्र का पारम्परिक अन्त्यपद; एक निश्चित साधारण शब्दार्थ प्रमाणित नहीं।IAST में c का ध्वनि-संकेत च है; रोमन “vichche” अपने-आप अलग संस्कृत पाठ नहीं है।

यह तालिका एक ही मन्त्र के अंश समझाती है; छः नए स्वतन्त्र मन्त्र नहीं बनाती। शब्दों का परिचय किसी जप-संख्या, न्यास-विधि, श्वास-अभ्यास या सिद्धि का निर्देश नहीं है। 2

ॐ होने पर भी नाम ‘नवाक्षरी’ क्यों? एक पारम्परिक गणना में ऐं (१) + ह्रीं (१) + क्लीं (१) + चा-मु-ण्डा-यै (४) + वि-च्चे (२) = ९ माना जाता है। आरम्भ का प्रणव ॐ इस विश्लेषण में अलग रखा गया है। यह नाम और पाठ को समझाने की सैद्धान्तिक गिनती है, अक्षरन्यास या अनुष्ठान की प्रक्रिया नहीं। किसी सम्प्रदाय के साधना-पाठ की अंतिम मर्यादा इसकी सहायता से निर्धारित नहीं की जा सकती। 2 4

देवीमाहात्म्य से सम्बन्ध: संदर्भ और मूल श्लोक अलग बातें हैं

देवीमाहात्म्य, जिसे दुर्गासप्तशती कहा जाता है, शाक्त परम्परा का प्रसिद्ध ग्रन्थ है। आधुनिक पाठ-संग्रहों में मुख्य तेरह अध्यायों के आसपास अलग-अलग स्तोत्र, प्रारम्भिक और समापन-पाठ तथा विधियाँ मिलती हैं। जाँची गई नवार्णविधि इस मन्त्र को उसी अनुषंगी पाठ-परम्परा में प्रस्तुत करती है। दूसरी ओर सिद्धकुञ्जिकास्तोत्र के पाठ में संक्षिप्त मन्त्र के बाद एक अलग लम्बा मन्त्र भी आता है। इस साक्ष्य से नवार्ण मन्त्र को मुख्य तेरह अध्यायों के किसी मनमाने क्रमांक वाले श्लोक में रख देना प्रमाणित नहीं होता। 2 3

चामुण्डा नाम और शक्ति-परम्परा

चामुण्डा देवी के उग्र रूप का नाम है, जो चण्ड-मुण्ड की कथा से परम्परागत रूप में जुड़ा है। लेकिन उस कथात्मक सम्बन्ध को यह नहीं समझना चाहिए कि ऐं-ह्रीं-क्लीं सामान्य युद्ध-वर्णन के संस्कृत शब्द हैं। माँ दुर्गा, काली और व्यापक शक्ति-परम्परा से सम्बन्धित पूजा विभिन्न समुदायों में भिन्न रूप लेती है। किसी वेबसाइट पर मन्त्र मिल जाना सभी शाखाओं की साधना-स्वीकृति का प्रमाण नहीं है।

पाठभेद और सम्पादकीय सीमाएँ

  1. ॐ-सहित तथा ॐ-रहित रूप: मुख्य प्रस्तुति में ॐ है; दूसरे जाँचे गए स्रोत में प्रणव-रहित रूप भी है। इनको मिलाकर नया मिश्रित मन्त्र नहीं बनाया गया। 1 4
  2. रोमन लिप्यन्तरण का भेद: IAST का vichchevicce तथा लोकप्रिय ‘vichche’ देवनागरी ‘विच्चे’ के दो रोमन ढंग हो सकते हैं; यह अपने-आप प्राचीन पाण्डुलिपि का पाठभेद नहीं।
  3. सिद्धकुञ्जिका का दीर्घ मन्त्र: वह स्वतंत्र अगला अंश है; सम्बन्धित पाठ में उसकी पंक्तियाँ जोड़ना मूल एक-पंक्ति चयन को बदल देगा। 3
  4. ऋषि-विनियोग बनाम ऐतिहासिक रचनाकार: पूजा-पाठ में निर्दिष्ट ऋषि, छन्द या देवता को बिना प्रमाण किसी आधुनिक जीवनी-आधारित काव्य-लेखक की पहचान नहीं मान सकते। 2

लिपि, उच्चारण और साधना-मर्यादा

अंग्रेज़ी लेख में IAST रूप oṃ aiṃ hrīṃ klīṃ chamundayai vichcheoṃ aiṃ hrīṃ klīṃ cāmuṇḍāyai vicce दिया है। यह समझने योग्य लिखित लिप्यन्तरण है; गुरु-परम्परा का प्रमाणित ध्वनि-रिकॉर्ड, वैदिक स्वर-चिह्न या विशेष तान्त्रिक उच्चारण-प्रशिक्षण नहीं। बीजमन्त्र के औपचारिक उपयोग में दीक्षा तथा परम्परा के प्रश्न आ सकते हैं; इसलिए अभ्यास का वर्गीकरण UNKNOWN_REVIEW_REQUIRED रखा गया है। इस लेख में न दीक्षा का सार्वभौम अनिवार्य नियम घोषित है, न बिना मार्गदर्शन किसी भी विशिष्ट विधि के करने की छूट दी गई है। जप-संख्या, मुहूर्त, प्राणायाम, न्यास, मुद्रा, हवन और सिद्धि-विधि यहाँ नहीं बताई गई। आस्था में वर्णित लाभों को चिकित्सा, धन या सुरक्षा का प्रमाणित परिणाम नहीं माना गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस संस्करण का सम्पूर्ण नवार्ण मन्त्र कौन-सा है? आरम्भ में दिया गया एक-पंक्ति वाला पूरा ॐ-सहित पाठ ही चयनित मन्त्र है। अन्य स्रोत में ॐ-रहित विकल्प का भी उल्लेख है। साथ की अनुष्ठान-विधियाँ इस संस्करण का हिस्सा नहीं हैं। 1 4

‘विच्चे’ का अर्थ ‘मेरे संकट काट दो’ है? उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे निश्चित संस्कृत शब्दार्थ कहना उचित नहीं। यह मन्त्र का तकनीकी पद है, जिसके अर्थ पर अलग परम्पराओं में व्याख्या मिल सकती है; इस व्याख्या को अंतिम या सर्वमान्य नहीं माना गया है।

क्या यह वास्तव में नौ अक्षरों का मन्त्र है? बताई गई पारम्परिक गणना में हाँ, यदि शुरू के ॐ को अलग रखा जाए। नौ-अक्षर का नाम किसी विशेष साधना-विधि या निजी जप-संख्या का आदेश नहीं है।

क्या यह देवीमाहात्म्य के तेरह मुख्य अध्यायों का कोई निश्चित श्लोक है? जाँचे स्रोत इसे पाठ-विधि और सिद्धकुञ्जिका के प्रसंग में रखते हैं, मुख्य कथात्मक अध्यायों का प्रमाणित श्लोक क्रमांक नहीं देते। इसलिए यहाँ कोई मनगढ़न्त अध्याय/श्लोक संख्या नहीं दी गई। 2 3

क्या यह पृष्ठ दीक्षा अथवा मन्त्र-जप का मार्गदर्शन है? नहीं। यह मूल पाठ, परम्परागत अर्थ और स्रोत-समीक्षा का शैक्षिक प्रारूप है। साधना-अधिकार को हर परम्परा में एक जैसा नहीं माना गया है। यहाँ नियम, निश्चित संख्या, रहस्य-विधि या अलौकिक परिणाम की गारंटी नहीं है। नहीं। प्राचीन पाठ-साक्ष्य, पुनर्प्रकाशन-अधिकार, संस्कृत-पारखी की जाँच, हिन्दी-अंग्रेज़ी समीक्षा और साधना-सीमा की स्वीकृति शेष है।

स्रोत, श्रेय और लाइसेंस

संस्थापक द्वारा अधिकृत शैक्षिक प्रस्तुति। स्वतंत्र पाठ और विशेषज्ञ समीक्षा अधूरी है। यह दीक्षा या व्यक्तिगत अनुष्ठान की अनुमति नहीं है।

Inherited traditional wording; selected witness cited below. Romanization, meanings and explanations prepared for ShivGoraksh. No modern source translation, page layout or recording reproduced.

संस्करण का मूल रोमन पाठ

इस संस्करण में दिया गया रोमन पाठ, सरल रोमन प्रदर्शन से पहले की वर्तनी और शब्द-रूपों सहित।

  1. 1

    oṃ aiṃ hrīṃ klīṃ cāmuṇḍāyai vicce.

स्रोत तथा सम्पादकीय स्थिति

  • 1 द्रिक पञ्चाङ्ग: ‘श्री दुर्गा नवार्ण मन्त्र’, एक-पंक्ति मूल पाठ।
  • 2 द्रिक पञ्चाङ्ग: ‘नवार्णविधि’, पाठ का सन्दर्भ और बीज-संज्ञाएँ।
  • 3 द्रिक पञ्चाङ्ग: ‘सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्’, अलग दीर्घ मन्त्र से सीमा का भेद।
  • 4 कर्मकाण्ड विधि: ॐ-सहित तथा ॐ-रहित विकल्प का दस्तावेज़ी उल्लेख। स्रोतों के URL, जाँचे गए अनुभाग, पाठभेद और अधिकार-संबंधी अलग प्रश्न स्रोत-सूची में उपलब्ध हैं। पाठ-स्थिति: partial का अर्थ है कि चुने हुए आधुनिक स्रोत के अनुसार एक-पंक्ति पाठ पूरा है; लेकिन प्राचीन मूल, मुद्रित प्रति का अक्षरशः मिलान, पुनर्प्रकाशन-अनुमति, ध्वनि और परम्परा-पारखी की स्वीकृति अभी नहीं मिली।
  1. Durga Navarna Mantra / श्री दुर्गा नवार्ण मन्त्र · स्रोत खोलें
  2. Durga Saptashati Navarna Vidhi / अथ नवार्णविधि · स्रोत खोलें
  3. Durga Saptashati Siddha Kunjika Stotram · स्रोत खोलें
  4. नवार्ण जप विधि, सप्तशती न्यास · स्रोत खोलें