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शिव का नटराज रूप क्या दर्शाता है?

English

नटराज का अर्थ है ‘नृत्य के स्वामी’। इस रूप में शिव प्रायः अग्नि के वलय के भीतर नृत्य करते दिखाई देते हैं। उनके हाथों में डमरू और अग्नि हो सकते हैं। दक्षिण भारतीय प्रतिमा-व्याख्या में डमरू सृष्टि का, अग्नि लय का और नृत्य जगत की निरन्तर गति का संकेत है। अभयमुद्रा संरक्षण दर्शाती है; उठा हुआ चरण शरण या मुक्ति का प्रतीक है। दूसरे चरण के नीचे अपस्मार अज्ञान या भ्रम से सम्बन्धित है।

इस प्रकार नटराज का रूप ब्रह्माण्डीय परिवर्तन और आध्यात्मिक अर्थ को जोड़ता है। इसमें केवल संहार नहीं, अज्ञान से मुक्ति का संदेश भी है। विभिन्न प्रतिमाओं में मुद्रा और चिह्न बदल सकते हैं; इसलिए विस्तृत अर्थ सम्बन्धित कला और परम्परा के अनुसार बताने चाहिए। यह धार्मिक प्रतीक है, भौतिक ब्रह्माण्ड का शाब्दिक वैज्ञानिक नक्शा नहीं।

संदर्भ और स्रोत

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  1. Shiva as Lord of Dance (Nataraja), object 1987.80.1
  2. Shiva as Lord of Dance, object 64.251
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