शिवलिंग शिव की उपासना का पवित्र चिह्न या प्रतीक है। इसका सामान्य रूप आधार में स्थापित ऊपर उठी हुई सरल आकृति का होता है। अनेक शैव व्याख्याओं में यह मानवाकार प्रतिमा से परे शिव की उपस्थिति को व्यक्त करता है, जबकि अन्य व्याख्याएँ सृजनात्मक शक्ति पर बल देती हैं। ऐतिहासिक उदाहरणों में सामान्य निराकार-चिह्न जैसे लिंग और एक या अधिक शिव-मुखों वाले मुखलिंग दोनों मिलते हैं।
संस्कृत में ‘लिंग’ का अर्थ ‘चिह्न’ भी है, लेकिन वास्तविक उपासना और कला का इतिहास केवल शब्दार्थ से अधिक समृद्ध है। कुछ ऐतिहासिक रूपों में जनन-शक्ति से जुड़ी आकृतियाँ भी हैं; फिर भी हर शिवलिंग को केवल यौन प्रतीक कहना उसके धार्मिक, दार्शनिक और कलात्मक अर्थों को अधूरा कर देता है। किसी विशेष मन्दिर या ग्रन्थ का अर्थ उसी के सन्दर्भ में समझना चाहिए।



