शक्तिपीठ देवी की उपासना से जुड़े पवित्र तीर्थस्थल हैं। अनेक धार्मिक कथाएँ इनके उद्गम को शिव की अर्धांगिनी सती से जोड़ती हैं और बताती हैं कि उनके देहावसान के बाद शरीर के अंगों अथवा आभूषणों से सम्बद्ध स्थान तीर्थ माने गए। कथा का विवरण ग्रन्थ तथा क्षेत्रीय परम्परा के अनुसार बदलता है। शक्तिपीठ जीवित तीर्थ-परम्पराओं के केन्द्र हैं, केवल किसी एक स्थिर सूची के नाम नहीं।
51 शक्तिपीठों की सूची प्रसिद्ध है, पर अन्य ग्रन्थों तथा परम्पराओं में संख्या और स्थल-पहचान भिन्न मिलती है। कहीं सम्बद्ध भैरव या शिवरूप का भी वर्णन होता है। इसलिए मूल ग्रन्थ और स्थल-साक्ष्य स्पष्ट किए बिना एक ही सूची को सर्वमान्य बताना उचित नहीं है। धार्मिक उत्पत्ति-कथा और किसी स्थल के इतिहास या पुरातत्त्व के प्रमाणों में भी भेद आवश्यक है।



