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विभिन्न परम्पराओं में शिव और शक्ति के संबंध को कैसे समझा जाता है?

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अनेक शैव और शाक्त परम्पराओं में शिव और शक्ति का अत्यन्त घनिष्ठ सम्बन्ध है, पर उसकी एक ही सर्वमान्य दार्शनिक व्याख्या नहीं है। कुछ अद्वैत शैव मतों में शिव को चैतन्य और शक्ति को उसकी स्वाभाविक अभिव्यक्ति-सामर्थ्य के रूप में समझा जाता है; वहाँ दोनों को पृथक प्रतिद्वन्द्वी नहीं माना जाता। अर्धनारीश्वर की संयुक्त प्रतिमा इस अभिन्नता का प्रसिद्ध रूपक है।

कुछ शाक्त दर्शनों में देवी को जगत् की परम मूल सत्ता बताया जाता है; कुछ शैव दर्शनों में शिव की सर्वोच्चता पर बल है; और भक्ति-कथाओं में शिव-पार्वती का दाम्पत्य सम्बन्ध प्रमुख होता है। ये अलग-अलग धार्मिक दृष्टिकोण हैं। किसी एक सूत्र को सभी हिन्दू परम्पराओं का मत बताने के बजाय सम्बन्धित दर्शन या ग्रन्थ का नाम स्पष्ट करना चाहिए।

संदर्भ और स्रोत

ये संदर्भ मूल उत्तर के साथ दिए गए हैं। स्वतंत्र स्रोत और विशेषज्ञ सत्यापन अभी पूरे नहीं हैं।

  1. The nature and significance of the Hindu Divine Mother in embodied thealogical perspective
  2. Recognizing the Gods
  3. Hindu Goddesses: Visions of the Divine Feminine in the Hindu Religious Tradition
इन उत्तरों के बारे में

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