देवीमाहात्म्य अर्थात ‘देवी की महिमा’ एक महत्त्वपूर्ण संस्कृत ग्रन्थ है, जो मार्कण्डेयपुराण का अंग है। यह दुर्गासप्तशती नाम से प्रसिद्ध है और इसके पाठ को सामान्यतः चण्डीपाठ से जोड़ा जाता है। इसमें देवी की विभिन्न अभिव्यक्तियों, असुरों पर विजय और भक्तों को दिए गए आश्वासनों के प्रसंग हैं। विशेषतः शाक्त परम्पराओं में इसका बड़ा महत्त्व है।
‘सप्तशती’ नाम इसकी पारम्परिक सात-सौ मन्त्र/श्लोक पाठ-गणना को दर्शाता है; वास्तविक पद-विभाजन और पाठ-क्रम की पुष्टि संबंधित संस्करण से करनी चाहिए। पाठ-विधि में कवच आदि अतिरिक्त अंग भी जोड़े जा सकते हैं, पर उन्हें बिना भेद बताए तेरह-अध्यायी मूल कथा का अंश नहीं कहना चाहिए। इसकी धर्म-व्याख्या एक ही रूप में सभी शाक्त समुदायों पर लागू नहीं होती।



