गोरखनाथ (गोरक्षनाथ, गोरक्ष) नाथ सम्प्रदाय के अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पूज्य गुरुओं में गिने जाते हैं। अनेक समुदाय उन्हें आदर्श योगी तथा नाथ-शिक्षाओं के प्रमुख प्रवर्तक या संवाहक के रूप में मानते हैं। कथाओं में उनका तप, गुरु-शिष्य संवाद और असाधारण योगसिद्धि वर्णित है; कुछ भक्तिपरक धाराएँ उन्हें शिव से सीधे जोड़ती हैं।
उनका निश्चित ऐतिहासिक काल अभी विवादित है। शोधकर्ताओं के लिए श्रद्धा-परम्परा का गोरखनाथ और स्वतंत्र साक्ष्यों से प्रमाणित जीवनी—दो अलग प्रश्न हैं। संस्कृत एवं लोकभाषाओं के बहुत-से ग्रन्थ उनके नाम से प्रचलित हैं, किन्तु केवल नामोल्लेख से यह सिद्ध नहीं होता कि हर उपलब्ध ग्रन्थ उन्होंने स्वयं लिखा। इसलिए उनके परम्परागत महत्त्व और ऐतिहासिक अनिश्चितता—दोनों बताना आवश्यक है।



