नाम-जप ईश्वर के नाम की भक्तिपूर्वक पुनरावृत्ति है और अनेक भक्ति-परम्पराओं में सार्वजनिक रूप से प्रचलित है। दीक्षा-आधारित मन्त्र-साधना किसी विशिष्ट गुरु-परम्परा या अधिकृत अनुष्ठान से जुड़ी हो सकती है, जहाँ मन्त्र, पात्रता, उच्चारण या सहायक क्रियाओं पर नियम हों। दोनों शब्द कभी व्यापक धार्मिक भाषा में मिलते हैं, लेकिन किसी नाम का सार्वजनिक रूप से प्रसिद्ध होना उसके हर विशेष प्रयोग की अनुमति नहीं है। शिवगोरक्ष सार्वजनिक भक्ति समझाए, पर प्रतिबन्धित विधि अलग रखे और स्वयं गुरु होने का दावा न करे। किसी मन्त्र की श्रेणी परम्परागत साक्ष्य से तय होनी चाहिए।
संदर्भ और स्रोत
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- Bhagavad Gītā 10.25 — IIT Kanpur Gita Supersite
- Devī Māhātmya / Caṇḍī tradition — primary text and ancillary recitation manuals
- Śābara mantra / Nāth regional literature and manuscript witnesses



