मन्त्र ऐसा पवित्र शब्द, वाक्यांश, वैदिक ऋचा अथवा ध्वनि-समूह है जिसका उपयोग विभिन्न हिन्दू परम्पराओं में उपासना, स्मरण, पाठ, ध्यान या अनुष्ठान के लिए किया जाता है। कुछ मन्त्रों के शब्दों का अपेक्षाकृत स्पष्ट अर्थ होता है; विशेषतः बीजमन्त्रों की व्याख्या किसी विशिष्ट परम्परा की शिक्षा पर निर्भर हो सकती है।
हर प्रेरक वाक्य मन्त्र नहीं होता और सभी मन्त्रों के उपयोग की एक जैसी विधि भी नहीं होती। वैदिक पाठ में पाठ-परम्परा और स्वर महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं; भक्ति में नाम-स्मरण को विशेष स्थान मिलता है; कुछ तान्त्रिक मन्त्रों के साथ दीक्षा की मर्यादा जुड़ी होती है। इसलिए किसी मन्त्र को समझते समय उसकी पहचान, मूल स्रोत या परम्परा और उपयोग का संदर्भ अलग-अलग बताना आवश्यक है। केवल परिचय प्राप्त होना किसी विशेष साधना की अनुमति नहीं है।



