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विभिन्न परम्पराएँ शिव और शंकर के संबंध को कैसे समझती हैं?

English

शिव और शंकर (शङ्कर) सामान्य भक्तिभाषा में एक ही आराध्य देवता के नाम हैं; संस्कृत शब्दकोशों में भी ‘शंकर’ शिव का नाम दर्ज है। लेकिन कुछ दार्शनिक या उपदेश-परम्पराएँ इन शब्दों में भेद करती हैं। उदाहरणतः किसी परम्परा में ‘शिव’ से अव्यक्त परम तत्त्व और ‘शंकर’ से उसके साकार, सुलभ रूप का संकेत किया जा सकता है।

यह भेद उस विशेष परम्परा में अर्थपूर्ण है, किन्तु इसे सभी हिन्दू या शैव मतों का अनिवार्य निष्कर्ष नहीं मानना चाहिए। अन्य भक्त और ग्रन्थ दोनों नामों को एक ही देवता के लिए बिना ऐसा अस्तित्वगत भेद किए प्रयोग करते हैं। इसलिए ShivGoraksh में दोनों नामों का अलग परिचय और परम्परा-विशिष्ट सम्बन्ध रखना उपयोगी होगा; साथ ही न तो यह कहना उचित है कि वे हर अर्थ में अनिवार्यतः समान हैं और न कि वे सर्वत्र दो अलग देवता हैं।

संदर्भ और स्रोत

ये संदर्भ मूल उत्तर के साथ दिए गए हैं। स्वतंत्र स्रोत और विशेषज्ञ सत्यापन अभी पूरे नहीं हैं।

  1. Sanskrit dictionary entry: śaṅkara (Apte, Monier-Williams)
  2. Sanskrit dictionary entry: śiva (Apte and Monier-Williams)
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