शिव हिन्दू परम्पराओं के प्रमुख देवता हैं और शैव परम्पराओं में उनका विशेष स्थान है। अनेक शैव दर्शनों में उन्हें परम दिव्य तत्त्व माना जाता है; अन्य हिन्दू परम्पराओं में वे महान देवता हैं, जिनका परम सत्ता से सम्बन्ध अलग-अलग ढंग से समझाया जाता है। उनके परिचित रूपों में ध्यानस्थ योगी, पार्वती के साथ गृहस्थ, नटराज तथा शिवलिंग के रूप में उपासना शामिल हैं।
शिव का सम्बन्ध संहार और नवीन सृष्टि से जोड़ा जाता है, पर केवल ‘संहारकर्ता’ कहना उनके स्वरूप को सीमित कर देता है। भक्त उन्हें करुणामय ईश्वर, गुरु, रक्षक और मुक्ति के आश्रय के रूप में भी मानते हैं। विभिन्न ग्रन्थ और दर्शन इन भूमिकाओं की व्याख्या समान रूप से नहीं करते; इसलिए किसी एक परम्परा की मान्यता को सभी परम्पराओं का निष्कर्ष नहीं मानना चाहिए.



