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शाक्त परम्पराओं में काली कौन हैं?

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काली अनेक शाक्त परम्पराओं की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण देवी हैं और बंगाल की भक्ति-परम्पराओं में उनका विशेष स्थान है। उनके उग्र रूप का सम्बन्ध विनाशकारी शक्तियों पर विजय, मृत्यु की सीमाओं और सांसारिक आसक्ति से परे जाने जैसे विषयों से जोड़ा जाता है। भयावह रूप का अर्थ यह नहीं कि देवी 'अशुभ' हैं; भक्त उन्हें करुणामयी एवं रक्षिका माता भी मानते हैं।

देवीमाहात्म्य में चण्ड और मुण्ड से युद्ध के प्रसंग में देवी का उग्र रूप प्रकट होता है; अन्य शाक्त और तान्त्रिक परम्पराओं में काली स्वयं सर्वोच्च देवी भी मानी जाती हैं। चित्रों में कृष्णवर्ण, खड्ग, मुण्डमाला और कभी शिव के ऊपर स्थित स्वरूप दिखाई देता है। इनके अर्थ परम्पराओं के अनुसार बदलते हैं; काली की सम्पूर्ण उपासना को केवल एक कथा तक सीमित नहीं करना चाहिए।

संदर्भ और स्रोत

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  1. Kali Presenting the Heads of Chanda and Munda to Durga
  2. Goddess Kali (Calcutta ca. 1880–85)
  3. Kali, the wrathful protector (Kolkata ca. 1879)
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