संस्कृत में शक्ति का सामान्य अर्थ सामर्थ्य, क्षमता या बल है। हिन्दू धार्मिक चिन्तन में यह किसी देवता की कार्यकारी सामर्थ्य, परम तत्त्व के सक्रिय पक्ष अथवा स्वयं देवी को सूचित कर सकती है। देवी को सर्वोच्च मानने वाली शाक्त परम्पराओं में शक्ति केवल किसी पुरुष-देवता की सहायक सत्ता नहीं, बल्कि सृष्टि और मुक्ति से सम्बद्ध परम दिव्य वास्तविकता भी मानी जाती है।
अन्य परम्पराओं में शिव, विष्णु या किसी अन्य देवता की शक्ति की चर्चा हो सकती है। उनके आपसी सम्बन्ध की दार्शनिक व्याख्या अलग-अलग होती है। इसलिए 'शक्ति का अर्थ ऊर्जा है' प्रारम्भिक परिचय तो है, पर पूर्ण परिभाषा नहीं; इसे प्रयोगशाला में मापी जाने वाली भौतिक ऊर्जा के समान नहीं मानना चाहिए। इस शब्द में दिव्य सामर्थ्य, ज्ञान और क्रियाशीलता के अनेक अर्थ समाहित हैं।



