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शैव दर्शन में अद्वैत का क्या अर्थ है?

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अद्वैत शैव दर्शन में सामान्यतः यह प्रतिपादित किया जाता है कि परम चैतन्यरूप शिव से जगत् और जीव का गहनतम स्वरूप अन्ततः पृथक् नहीं है। अनुभव की विविधता को शिव की शक्ति की अभिव्यक्ति के रूप में समझा जाता है, न कि पूर्णतः स्वतन्त्र दूसरी परम सत्ता के रूप में। कुछ प्रत्यभिज्ञा आचार्य जगत् की वास्तविक अभिव्यक्ति पर बल देते हैं; वे उसे केवल निरर्थक भ्रम बताकर नहीं हटाते।

किन्तु सभी शैव मत अद्वैतवादी नहीं हैं। शैव सिद्धान्त के ऐतिहासिक रूपों में पति, जीव और बन्धन का वास्तविक अन्तर माना जाता है। इसी प्रकार काश्मीर शैव अद्वैत और अद्वैत वेदान्त को बिना भेद के समान नहीं कहना चाहिए; उनके ग्रन्थ, तर्क और जगत् की व्याख्या अलग हैं। अधिक सटीक उत्तर में सम्प्रदाय का नाम आवश्यक है।

संदर्भ और स्रोत

ये संदर्भ मूल उत्तर के साथ दिए गए हैं। स्वतंत्र स्रोत और विशेषज्ञ सत्यापन अभी पूरे नहीं हैं।

  1. Shaiva Siddhanta
  2. Kashmiri Shaiva Philosophy
  3. Cosmic Process, Philosophy, and Soteriology in the Works of Abhinavagupta
इन उत्तरों के बारे में

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