शैव मत (शैव परम्परा) हिन्दू धर्म की उन विविध परम्पराओं का व्यापक नाम है जिनमें शिव उपासना के प्रमुख देवता, परमेश्वर या कुछ दार्शनिक मतों में परम वास्तविकता माने जाते हैं। यह कोई एक संगठन या सर्वथा एकरूप सिद्धान्त नहीं है। शैव समुदायों में मन्दिर-पूजा, भक्ति-काव्य, संन्यास, दर्शन, योग, आगम और दीक्षा से जुड़ी अनेक धाराएँ विकसित हुई हैं।
इसका ऐतिहासिक सम्बन्ध रुद्र-शिव की उपासना से है, किन्तु शिव, जीव और जगत् के सम्बन्ध की व्याख्या सभी मतों में समान नहीं है। उदाहरण के लिए, शैव सिद्धान्त की महत्त्वपूर्ण धाराएँ ईश्वर और जीव का वास्तविक भेद मानती हैं, जबकि काश्मीर की प्रभावशाली शैव परम्पराओं में अद्वैत की व्याख्या मिलती है। किसी विशेष सिद्धान्त का परिचय देते समय सम्बद्ध सम्प्रदाय स्पष्ट करना आवश्यक है।



