नया साधक किसी पूजा-मार्गदर्शिका को परखते समय देखे कि वह किस परम्परा पर आधारित है, उसे किसने तैयार और जाँचा है तथा उसके दावों के स्रोत क्या हैं। अच्छी मार्गदर्शिका सामान्य परिचय और वास्तविक विधि में भेद करती है; आराध्य, अवसर, ग्रन्थ या स्थानीय रीति का नाम बताती है और आवश्यक, वैकल्पिक तथा परम्परागत रूपों को अलग रखती है। मन्त्र, पंचांग-समय और मन्दिर-नियम स्वतंत्र रूप से जाँचे जा सकने चाहिए।
बिना स्रोत के श्लोक, निश्चित चमत्कार का वादा, सभी परम्पराओं के लिए एक ही विधि, दीक्षागत निर्देशों का अनियंत्रित प्रकाशन या अपरीक्षित मुहूर्त-गणना सावधानी के संकेत हैं। लोकप्रियता, सुन्दर डिज़ाइन या AI से तैयार भाषा धार्मिक प्रामाणिकता का प्रमाण नहीं। विशेष अनुष्ठानों में योग्य मार्गदर्शन और सुरक्षा आवश्यक है; ShivGoraksh के अपने प्रारूप भी समीक्षा के बाद ही प्रकाशित होंगे।



