व्रत किसी धार्मिक उद्देश्य या संकल्प के साथ स्वीकार किया गया नियम अथवा अनुष्ठान है। परम्परा के अनुसार इसमें प्रार्थना, पूजा, संयम, पाठ, भोजन-संबंधी नियम, उपवास या किसी पर्व का विशेष पालन शामिल हो सकता है। इसलिए व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है; उसके विविध रूप अलग क्षेत्रों और ऐतिहासिक कालों में विकसित हुए हैं।
किसी क्षेत्र का परिचित व्रत सभी हिन्दुओं के लिए समान नियम नहीं बनता और उससे इच्छित परिणाम की गारंटी भी नहीं मिलती। निर्धारित नियम और छूट उस विशिष्ट व्रत तथा परम्परा से जुड़े होते हैं। कुछ लोगों के लिए उपवास स्वास्थ्य-जोखिम पैदा कर सकता है; यह FAQ व्यक्तिगत चिकित्सकीय या धार्मिक निर्देश नहीं है। विस्तृत पालन-विधि के लिए विश्वसनीय, समीक्षा-युक्त मार्गदर्शन आवश्यक है।



