अभिषेक का अर्थ किसी पूज्य मूर्ति या प्रतीक को विधिपूर्वक स्नान कराना अथवा उस पर द्रव्य अर्पित करना है। शिव-आराधना में यह सामान्यतः शिवलिंग के अभिषेक से जुड़ा होता है। जल व्यापक रूप से प्रयुक्त होता है; कुछ मन्दिरों और स्थानीय परम्पराओं में अन्य द्रव्य भी मिलते हैं। इसका भक्तिपरक आशय श्रद्धा और सम्मान प्रकट करना है।
अभिषेक का सामान्य अर्थ और उसकी पूर्ण अनुष्ठान-विधि अलग विषय हैं। सभी शैव मन्दिरों पर एक ही सामग्री, क्रम, मन्त्र अथवा पात्रता-नियम लागू नहीं होते। विशिष्ट प्रक्रिया के लिए संबंधित परम्परा, स्रोत और मन्दिर-नियमों की पुष्टि आवश्यक है। यह उत्तर किसी निश्चित अभिषेक-विधि को स्वीकृति नहीं देता।



