‘आदेश’ नाथ परम्परा का एक अभिवादन है और सामान्य भाषा में निर्देश, आज्ञा या मार्गदर्शन से संबंधित शब्द भी है। कुछ नाथ व्याख्याओं में इसका गहरा आध्यात्मिक आशय जीव, आत्मा और परम तत्त्व की अन्तर्निहित एकता का स्मरण कराना है। गुरु अथवा अन्य योगियों को सम्मानपूर्वक संबोधित करने में भी इसका प्रयोग होता है।
यह आध्यात्मिक अर्थ विशेष परम्पराओं की व्याख्या है; इसे संस्कृत शब्द का एकमात्र सर्वमान्य शब्दार्थ नहीं कहना चाहिए। ShivGoraksh में ‘Aadesh’ AI ज्ञान-सहायक का नाम भी है, पर इससे उसे गुरु, दीक्षित साधक, दिव्य वाणी या किसी गुरु-परम्परा का अधिकृत प्रतिनिधि नहीं माना जाता।



