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नाथ परम्पराओं में मत्स्येन्द्रनाथ कौन हैं?

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मत्स्येन्द्रनाथ (मत्स्येन्द्र, मच्छिन्द्रनाथ अथवा मीननाथ) अनेक नाथ गुरु-परम्पराओं के आधारभूत आचार्य माने जाते हैं। परम्परागत कथाओं में वे सामान्यतः गोरखनाथ के गुरु और शिव-संबद्ध योगज्ञान के संवाहक बताए जाते हैं। उनका नाम शैव और तान्त्रिक परम्पराओं के इतिहास में भी आता है।

उनकी पहचान क्षेत्र और समुदाय के अनुसार बदलती है। नेपाल के कुछ हिन्दू-बौद्ध परिवेशों में मच्छिन्द्रनाथ से जुड़े रूपों की संयुक्त श्रद्धा मिलती है; स्मिथसोनियन संग्रह में रातो मत्स्येन्द्रनाथ को अवलोकितेश्वर के रूप में दिखाने वाली कलाकृति भी दर्ज है। यह किसी एक क्षेत्र की पहचान है, सभी नाथ शाखाओं का एक समान सिद्धान्त नहीं। जन्म-कथा, काल और जीवन-वृत्त का बड़ा भाग परम्परागत आख्यानों से मिलता है; उन्हें निर्विवाद ऐतिहासिक जीवनी नहीं मानना चाहिए।

संदर्भ और स्रोत

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  1. Nātha Sampradāya
  2. Nāth Saṃpradāya
  3. Avalokiteshvara in the form of Rato Matsyendranath
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