सूर्योदय पर
कृष्ण एकादशी
- आरम्भ
- समाप्ति
दिन, तिथि और परम्परा
अपने नगर का पंचांग देखें और पर्वों की गणना-आधारित तारीखें जानें।
इन गणना-आधारित तारीखों का हर नगर और हर दिन के लिए स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। पर्व-दिन की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें; स्थान और परम्परा के अनुसार तारीख बदल सकती है। तारीखें कैसे चुनी जाती हैं
पंचांग का दायरा २०२६–२०२८ तक है।
वर्ष का परिचय · समय क्षेत्र: Asia/Kolkata
रविवार, 9 अगस्त 2026
चुना हुआ दिन
दिल्ली · रविवार
सभी समय भारतीय मानक समय (Asia/Kolkata) में हैं।
सूर्योदय पर
बाद में आने वाली तिथि
अगस्त 2026
सावन में शिवभक्ति के सोमवार, व्रत-पूजा और क्षेत्रीय पंचांगों की अलग-अलग गणना को समझें।
इस दिन का पंचांगएकादशी महीने में दो बार आने वाली चंद्र-तिथि है। विष्णु-भक्ति, पारण, स्मार्त-वैष्णव अंतर और प्रमुख परंपराएँ समझें।
इस दिन का पंचांगसावन में शिवभक्ति के सोमवार, व्रत-पूजा और क्षेत्रीय पंचांगों की अलग-अलग गणना को समझें।
इस दिन का पंचांगत्रयोदशी-संध्या से संबंधित नियमित शिव व्रत।
इस दिन का पंचांगहर चंद्रमास की कृष्ण चतुर्दशी से जुड़ी शिव-उपासना, निशीथ काल, व्रत और पंचांग के भेद समझें।
इस दिन का पंचांगमासिक अमावस्या तिथि, पितृ-स्मरण, तर्पण और विविध क्षेत्रीय परंपराओं को प्रमाण सहित समझें।
इस दिन का पंचांगसावन में शिवभक्ति के सोमवार, व्रत-पूजा और क्षेत्रीय पंचांगों की अलग-अलग गणना को समझें।
इस दिन का पंचांगएकादशी महीने में दो बार आने वाली चंद्र-तिथि है। विष्णु-भक्ति, पारण, स्मार्त-वैष्णव अंतर और प्रमुख परंपराएँ समझें।
इस दिन का पंचांगसावन में शिवभक्ति के सोमवार, व्रत-पूजा और क्षेत्रीय पंचांगों की अलग-अलग गणना को समझें।
इस दिन का पंचांगएकादशी महीने में दो बार आने वाली चंद्र-तिथि है। विष्णु-भक्ति, पारण, स्मार्त-वैष्णव अंतर और प्रमुख परंपराएँ समझें।
इस दिन का पंचांगत्रयोदशी-संध्या से संबंधित नियमित शिव व्रत।
इस दिन का पंचांगश्रावण पूर्णिमा से जुड़ा स्नेह और परस्पर जिम्मेदारी का पर्व, जिसमें पारिवारिक राखी के साथ विविध क्षेत्रीय परंपराएँ शामिल हैं।
इस दिन का पंचांगहर महीने की पूर्णिमा तिथि, सत्यनारायण कथा, क्षेत्रीय पौर्णमी परंपराएँ और अलग-अलग पंचांग नियम समझें।
इस दिन का पंचांगदिल्ली के लिए समय भारतीय मानक समय (Asia/Kolkata) में हैं। तारीखें सूर्य और चन्द्र की गणना से निकाली गई हैं; इनकी स्वतंत्र प्रमाणिकता समीक्षा पूरी नहीं हुई है।
यह उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त मास-परम्परा का उपयोग करता है। अलग-अलग परम्पराओं में पर्व या व्रत की तारीख अलग हो सकती है। कुछ लुप्त-सूर्योदय तिथियों का व्रत-दिन अभी अनिर्णीत है।
चन्द्र-चित्र सूर्योदय के समय की सांकेतिक आकृतियाँ हैं। मुहूर्त, पारण या घटस्थापना के समय यहाँ नहीं दिए जाते।
पंचांग की पूरी पद्धति और सीमाएँ