सूर्योदय पर
कृष्ण द्वितीया
- आरम्भ
- समाप्ति
दिन, तिथि और परम्परा
अपने नगर का पंचांग देखें और पर्वों की गणना-आधारित तारीखें जानें।
इन गणना-आधारित तारीखों का हर नगर और हर दिन के लिए स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। पर्व-दिन की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें; स्थान और परम्परा के अनुसार तारीख बदल सकती है। तारीखें कैसे चुनी जाती हैं
पंचांग का दायरा २०२६–२०२८ तक है।
वर्ष का परिचय · समय क्षेत्र: Asia/Kolkata
शनिवार, 4 अप्रैल 2026
चुना हुआ दिन
दिल्ली · शनिवार
सभी समय भारतीय मानक समय (Asia/Kolkata) में हैं।
सूर्योदय पर
बाद में आने वाली तिथि
इस गणना में इस दिन कोई पर्व या व्रत सूचीबद्ध नहीं है।
अप्रैल 2026
हनुमान की शक्ति, विवेक और रामभक्ति के साथ उत्तर और दक्षिण भारत में जयंती की अलग-अलग तिथियाँ समझें।
इस दिन का पंचांगहर महीने की पूर्णिमा तिथि, सत्यनारायण कथा, क्षेत्रीय पौर्णमी परंपराएँ और अलग-अलग पंचांग नियम समझें।
इस दिन का पंचांगएकादशी महीने में दो बार आने वाली चंद्र-तिथि है। विष्णु-भक्ति, पारण, स्मार्त-वैष्णव अंतर और प्रमुख परंपराएँ समझें।
इस दिन का पंचांगहर चंद्रमास की कृष्ण चतुर्दशी से जुड़ी शिव-उपासना, निशीथ काल, व्रत और पंचांग के भेद समझें।
इस दिन का पंचांगत्रयोदशी-संध्या से संबंधित नियमित शिव व्रत।
इस दिन का पंचांगमासिक अमावस्या तिथि, पितृ-स्मरण, तर्पण और विविध क्षेत्रीय परंपराओं को प्रमाण सहित समझें।
इस दिन का पंचांगदान, विष्णु–लक्ष्मी आराधना, शुभ आरंभ, आखा तीज और ओडिशा की कृषि-परंपरा—अक्षय तृतीया को व्यापक रूप से जानें।
इस दिन का पंचांगएकादशी महीने में दो बार आने वाली चंद्र-तिथि है। विष्णु-भक्ति, पारण, स्मार्त-वैष्णव अंतर और प्रमुख परंपराएँ समझें।
इस दिन का पंचांगत्रयोदशी-संध्या से संबंधित नियमित शिव व्रत।
इस दिन का पंचांगदिल्ली के लिए समय भारतीय मानक समय (Asia/Kolkata) में हैं। तारीखें सूर्य और चन्द्र की गणना से निकाली गई हैं; इनकी स्वतंत्र प्रमाणिकता समीक्षा पूरी नहीं हुई है।
यह उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त मास-परम्परा का उपयोग करता है। अलग-अलग परम्पराओं में पर्व या व्रत की तारीख अलग हो सकती है। कुछ लुप्त-सूर्योदय तिथियों का व्रत-दिन अभी अनिर्णीत है।
चन्द्र-चित्र सूर्योदय के समय की सांकेतिक आकृतियाँ हैं। मुहूर्त, पारण या घटस्थापना के समय यहाँ नहीं दिए जाते।
पंचांग की पूरी पद्धति और सीमाएँ