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हनुमान जयंती: शक्ति से आगे, विवेक और निस्वार्थ सेवा का उत्सव

चुने वर्ष की गणना-आधारित तारीख

दिल्ली · 2026 · Asia/Kolkata

इन गणना-आधारित तारीखों का हर नगर और हर दिन के लिए स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है। पर्व-दिन की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें; स्थान और परम्परा के अनुसार तारीख बदल सकती है। तारीखें कैसे चुनी जाती हैं

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दिल्ली के लिए समय भारतीय मानक समय (Asia/Kolkata) में हैं। तारीखें सूर्य और चन्द्र की गणना से निकाली गई हैं; इनकी स्वतंत्र प्रमाणिकता समीक्षा पूरी नहीं हुई है।

यह उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त मास-परम्परा का उपयोग करता है। अलग-अलग परम्पराओं में पर्व या व्रत की तारीख अलग हो सकती है। कुछ लुप्त-सूर्योदय तिथियों का व्रत-दिन अभी अनिर्णीत है।

चन्द्र-चित्र सूर्योदय के समय की सांकेतिक आकृतियाँ हैं। मुहूर्त, पारण या घटस्थापना के समय यहाँ नहीं दिए जाते।

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संदर्भ और स्रोत
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किसी हनुमान मंदिर में एक भक्त फूल लेकर आता है, दूसरा रामायण का पाठ करता है और किसी बच्चे को बजरंगबली का सबसे प्रिय प्रसंग समुद्र लाँघना लगता है। लेकिन हनुमान जयंती, जिसे हनुमान जन्मोत्सव भी कहते हैं, केवल अद्भुत बल की कथा नहीं है। इसमें उस सामर्थ्य का सम्मान होता है जो श्रीराम और सीता माता की सेवा, सत्य के प्रति निष्ठा तथा संकट के समय सही निर्णय लेने के लिए लगाया गया। 2, 3, 4

हनुमान को आंजनेय, अंजनीपुत्र, पवनपुत्र, मारुति, बजरंगबली, महावीर, केसरीनंदन और रामभक्त हनुमान कहा जाता है। उनके नाम के साथ पूरे भारत में गहरी श्रद्धा जुड़ी है, फिर भी हनुमान जयंती के लिए समस्त भारत में एक ही तिथि प्रचलित नहीं है। उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा प्रमुख है, जबकि कई दक्षिण भारतीय और ओड़िया परंपराएँ अलग चंद्र या सौर आधार पर उत्सव मनाती हैं। इन अंतरों को समझना श्रद्धा का सम्मान करना भी है और सही पंचांग जानकारी देना भी। 6, 7

हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है?

जयंती शब्द का प्रयोग प्रायः किसी पूज्य व्यक्तित्व या देवता के जन्म-स्मरण के लिए किया जाता है। जन्मोत्सव का सीधा अर्थ है जन्म का उत्सव। इस अवसर पर भक्त हनुमान के प्राकट्य को स्मरण करते हैं। जन्मकथाओं में माता अंजना, केसरी तथा वायुदेव का विशेष संबंध बताया जाता है। कुछ श्रद्धालु हनुमान को चिरंजीवी मानकर 'जन्मोत्सव' कहना पसंद करते हैं; यह उनकी भक्तिभावना है, पर इससे 'हनुमान जयंती' नाम अनुचित नहीं हो जाता। 1, 6

हनुमान के जीवन से चार गुण विशेष रूप से सामने आते हैं—बल, अर्थात कर्म करने की क्षमता; बुद्धि, अर्थात उचित-अनुचित का विवेक; भक्ति, अर्थात गहरा समर्पण; और सेवा, अर्थात अपनी योग्यता को दूसरों के हित में लगाना। रामायण में वे कभी अत्यंत विनम्र दूत हैं, कभी दृढ़ निश्चयी खोजी और कभी अकल्पनीय बाधा पार करने वाले योद्धा। इनमें से किसी एक रूप से उनका संपूर्ण चरित्र नहीं समझा जा सकता। 2, 3, 4

भक्तों के लिए हनुमान स्मरण साहस और विश्वास का आधार बनता है। परंपरागत स्तुतियों में संकटों से रक्षा की कामना व्यक्त होती है। इसे श्रद्धा की अभिव्यक्ति समझना चाहिए, चिकित्सा, परीक्षा, नौकरी, धन या किसी चमत्कार की प्रमाणित गारंटी नहीं। प्रार्थना और जिम्मेदार कर्म साथ चल सकते हैं।

माता अंजना, केसरी और वायुदेव

वाल्मीकि रामायण के किष्किन्धाकाण्ड के 66वें सर्ग में जाम्बवान हनुमान को उनकी शक्ति का स्मरण कराते हैं। समुद्र पार जाने से पहले उनका उत्साह बढ़ाते हुए वे अंजना की पृष्ठभूमि, केसरी से उनके संबंध और हनुमान के जन्म में वायुदेव की भूमिका का वर्णन करते हैं। इस प्रसंग का विशेष सौंदर्य यह है कि हनुमान में क्षमता पहले से है; जाम्बवान का विश्वास उन्हें उस क्षमता का उचित उपयोग करने का साहस देता है। 1

कई अन्य कथाओं में अंजना की तपस्या, देवताओं के वरदान और जन्म की परिस्थितियों का विवरण अलग मिलता है। इसलिए किसी एक लोकप्रचलित रूप के प्रत्येक विवरण को सभी हिंदू परंपराओं की एकमात्र मान्यता नहीं कहना चाहिए। अंजनीपुत्र नाम मातृसंबंध को और पवनपुत्र नाम वायु से संबंध को व्यक्त करता है। कथा के अनेक रूप हैं, किंतु सेवा और पराक्रम का मूल भाव साथ रहता है।

बाल हनुमान और सूर्य को फल समझने की कथा

बालक हनुमान द्वारा उगते सूर्य को फल समझकर उसकी ओर बढ़ने की कथा अत्यंत प्रसिद्ध है। यह प्रसंग कई ग्रंथीय और भक्तिपरक प्रस्तुतियों में मिलता है। शिवपुराण की शतरुद्रसंहिता के अध्याय 20 में भी बाल हनुमान और सूर्य का प्रसंग आता है। इसका प्रयोजन बाल-शक्ति, साहस, देवकृपा और शिक्षण की परंपरा को प्रकट करना है; इसे किसी प्राचीन खगोलीय घटना का वैज्ञानिक विवरण नहीं मानना चाहिए। 5

क्या हनुमान शिव के अवतार हैं?

कुछ शैव तथा अन्य भक्तिपरंपराओं में हनुमान को शिव या रुद्र का अंश अथवा अवतार माना जाता है। इस मत का पाठ-आधार भी मिलता है: शिवपुराण, शतरुद्रसंहिता, अध्याय 20 में हनुमान का वर्णन शिवावतार के रूप में किया गया है तथा उन्हें रामकार्य के लिए प्रकट हुआ बताया गया है। इसके विपरीत, यहाँ देखे गए वाल्मीकि रामायण के प्रसंग मुख्यतः अंजना, केसरी और वायु से जुड़ी कथा प्रस्तुत करते हैं; उनमें हर पाठक से वही शैव व्याख्या स्वीकार करने की अपेक्षा नहीं की गई है। 1, 5

शिवगोरक्ष के पाठकों के लिए यह एक सुंदर धार्मिक सेतु है: जिस हनुमान की महिमा रामभक्ति में विशेष है, उन्हीं को कुछ शैव परंपराएँ शिव से भी जोड़ती हैं। पर इसका अर्थ यह नहीं कि हनुमान जयंती को पूरे भारत में केवल 'शैव पर्व' कह दिया जाए। शंकर अनेक संदर्भों में शिव का ही नाम है, कोई अनिवार्य रूप से अलग देवता नहीं।

बुद्धिमान दूत के रूप में पहला परिचय

किष्किन्धाकाण्ड के तीसरे सर्ग में सुग्रीव की ओर से हनुमान श्रीराम और लक्ष्मण के पास पहुँचते हैं। उनका परिचय केवल बलशाली वानर का नहीं, बल्कि सावधानी से बात रखने वाले, परिस्थिति समझने वाले और विश्वास बनाने वाले प्रतिनिधि का है। रामायण का यह प्रसंग याद दिलाता है कि केवल शौर्य नहीं, बल्कि संयमित वाणी और सही समझ भी हनुमान की महानता का हिस्सा हैं। 2

समुद्र लाँघने का साहस

सुन्दरकाण्ड के प्रथम सर्ग में हनुमान सीता की खोज के लिए लंका की ओर समुद्र पार करने निकलते हैं। यात्रा में सामने आने वाली बाधाएँ उनके धैर्य, बुद्धि और उद्देश्यनिष्ठा को परखती हैं। इसी कारण समुद्र-लाँघन भक्तों के मन में असंभव प्रतीत होने वाले कार्य का साहसपूर्वक सामना करने का प्रतीक बन गया है। सुन्दरकाण्ड के पाठ में हनुमान की भूमिका प्रमुख रहने का यह एक महत्वपूर्ण कारण है। 3

सीता माता तक राम का संदेश

हनुमान का सबसे संवेदनशील कार्य केवल सीता तक पहुँचना नहीं, उन्हें विश्वास दिलाना भी है। वे लंका में अकेली और संकटग्रस्त सीता को श्रीराम की मुद्रिका दिखाते हैं। सुन्दरकाण्ड के 36वें सर्ग में यह मुद्रिका पहचान और आश्वासन का माध्यम बनती है। यहाँ शक्ति की वास्तविक कसौटी किसी को जीतना नहीं, किसी पीड़ित व्यक्ति तक सत्य और आशा पहुँचाना है। 4

आगे की परंपराओं में लक्ष्मण की सहायता के लिए औषधि लाने, रामसेना का साथ देने तथा संदेश पहुँचाकर लौटने के प्रसंग विशेष प्रिय हैं। अलग-अलग रामायणों और लोककथाओं में इनका वर्णन भिन्न हो सकता है। कोई प्रसिद्ध चित्र या कहानी अपने आप वाल्मीकि रामायण का शब्दशः उद्धरण नहीं बन जाती।

हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?

एक राष्ट्रव्यापी स्थिर ग्रेगोरियन तिथि देना भ्रामक होगा। उत्तर भारत की प्रमुख परंपरा में हनुमान जयंती चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। महाराष्ट्र सहित पश्चिम भारत की कई परंपराओं में भी यही दिन प्रमुख है। किंतु आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा में दूसरी मान्यताएँ मौजूद हैं। 6, 7, 8

क्षेत्र या परंपराप्रमुख रूप से वर्णित अवसरआवश्यक सावधानी
उत्तर भारत और महाराष्ट्र के अनेक समुदायचैत्र पूर्णिमास्थानीय पूर्णिमा तथा सूर्योदय-संबंधी चयन का सत्यापन आवश्यक है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगानावैशाख कृष्ण दशमी; चैत्र पूर्णिमा से आरंभ होने वाली हनुमान दीक्षा से जुड़ी परंपराप्रचलित लगभग 41-दिवसीय क्रम सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नहीं।
कर्नाटकमार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी; कई स्थानों पर हनुमान व्रतम्स्थानीय मंदिर और परिवार के नियम अलग हो सकते हैं।
तमिलनाडुमार्गळी / मार्गशीर्ष अमावस्या, कहीं मूल नक्षत्र का भी महत्वतमिल सौर मास और चंद्र तिथि का स्पष्ट संयोजन देखना होगा।
ओडिशापणा संक्रांति / महाविषुव संक्रांति, अर्थात परंपरागत मेष सौर संक्रांतियह सौर नववर्ष-संबंधी अवसर है, चैत्र पूर्णिमा का दूसरा नाम नहीं।
अयोध्या की कुछ मंदिर-संबद्ध मान्यताएँदीपावली-चक्र से जुड़ी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के आसपास हनुमान जन्मोत्सवमन्दिर की स्थानीय तिथि-परम्परा में भिन्नता सम्भव है।

इन प्रचलित भिन्नताओं का संकलन समकालीन पंचांग मार्गदर्शिका में मिलता है। ओडिशा पर्यटन विभाग पणा संक्रांति के साथ हनुमान जन्मोत्सव के संबंध की अलग से पुष्टि करता है। फिर भी ये संपादकीय जानकारी हैं, शिवगोरक्ष की स्वीकृत गणना-विधि या प्रकाशित तिथियाँ नहीं। 6, 7, 8

तिथि सूर्य और चंद्रमा की कोणीय स्थिति से निर्धारित होती है। वह अंग्रेज़ी कैलेंडर के दिन की तरह ठीक रात बारह बजे बदलती ही हो, ऐसा नहीं। किसी वर्ष पूर्णिमा एक दिन के सूर्योदय पर और दूसरे वर्ष दूसरे दिन के सूर्योदय पर हो सकती है। तमिल परंपरा में अमावस्या और मार्गळी का मेल देखना होगा; ओडिशा में सौर राशि-प्रवेश का प्रश्न है। इसलिए किसी एक शहर की तिथि दूसरे शहर, मत या परंपरा के लिए बिना जाँच लागू नहीं करनी चाहिए।

शिवगोरक्ष पर भविष्य में “[चयनित शहर] के लिए [चयनित परंपरा] के अनुसार अगली हनुमान जयंती” जैसा मॉड्यूल प्रदर्शित किया जा सकता है। जब तक उसके गणित, चयन नियम और संबंधित वर्ष का स्वतंत्र सत्यापन पूरा न हो, उचित संदेश होगा: “इस शहर और वर्ष के लिए तिथि/समय अभी सत्यापित नहीं है।”

क्या हनुमान जी का जन्म सूर्योदय, मंगलवार या विशेष नक्षत्र में हुआ था?

कुछ परंपराएँ सूर्योदय, मंगलवार, चित्रा नक्षत्र या मेष लग्न का उल्लेख करती हैं। ऐसी जानकारी को परंपरागत धार्मिक मान्यता के रूप में रखना चाहिए, न कि प्रमाणित ऐतिहासिक जन्म-समय या सभी क्षेत्रों पर लागू मुहूर्त के रूप में। इन विवरणों को जोड़कर अपने आप किसी वर्ष का पर्व-दिन निकाल लेना विश्वसनीय विधि नहीं है। 6

सरल पूजा और पाठ

अनेक घरों में पूजा-स्थान की सफाई करके हनुमान या रामदरबार के चित्र के सामने दीपक जलाया जाता है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फूल, फल या मिठाई अर्पित करते हैं और फिर हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड या रामायण के चुने हुए प्रसंग पढ़ते अथवा सुनते हैं। कहीं सामूहिक कीर्तन होता है, कहीं बुजुर्ग बच्चों को हनुमान की कथाएँ सुनाते हैं। ये सामान्य आचरण के उदाहरण हैं, हर घर के लिए अनिवार्य विधि नहीं। 6, 9

प्रसाद में बूंदी, बेसन के लड्डू, गुड़-चना, केला आदि कई जगह चढ़ाए जाते हैं। अनेक हनुमान मंदिरों में प्रतिमा पर सिंदूर और तेल का चोला चढ़ाने की परंपरा है। लोकप्रिय कथा कहती है कि श्रीराम के प्रति प्रेम में हनुमान ने अपने शरीर पर सिंदूर लगाया। इसे भक्ति और लोककथा के रूप में समझना उचित है; यहाँ जाँचे गए वाल्मीकि रामायण के प्रसंगों के नाम से इसका कोई अप्रत्यक्ष श्लोक नहीं गढ़ा गया है। कुछ मंदिरों में प्रतिमा को छूना या स्वयं चोला लगाना वर्जित हो सकता है, इसलिए स्थानीय निर्देश मानें। 9

हनुमान चालीसा परंपरानुसार गोस्वामी तुलसीदास से संबद्ध अवधी भक्ति-काव्य है। इसे संस्कृत की वाल्मीकि रामायण का कोई सर्ग नहीं कहना चाहिए। इसी प्रकार 'सुन्दरकाण्ड' का उल्लेख करते समय यह देखना आवश्यक है कि पाठ वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस या किसी दूसरी मान्य रामायण परंपरा से है। भक्तिभाव समान हो सकता है, किंतु ग्रंथों की पहचान अलग रखनी चाहिए। 3, 9

मंदिरों और समुदायों में उत्सव

विभिन्न स्थानों पर विशेष पूजा, आरती, हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ, भजन, शोभायात्रा या प्रसाद वितरण हो सकता है। कुछ जगह सवेरे विशेष दर्शन पर बल है, तो कहीं पूरे दिन या संध्या तक कार्यक्रम चलते हैं। मंदिर खुलने का समय, भीड़, प्रसाद, परिधान, प्रवेश-नियम और उत्सव का सटीक कार्यक्रम स्थानीय संस्थान से ही जानना चाहिए; इन्हें पूरे भारत के लिए एक जैसा नहीं बताया जा सकता। 6, 9

व्रत रखना जरूरी है क्या?

कुछ भक्त इस दिन व्रत रखते हैं; कुछ केवल सात्त्विक भोजन, पूजा या पाठ करते हैं। व्रत में क्या खाना है, किस समय भोजन करना है और व्रत कब समाप्त करना है—ये निर्णय घर, गुरु या मंदिर की परंपरा से जुड़े हैं। व्रत भक्ति की अनिवार्य परीक्षा नहीं है। बच्चों, गर्भवती व्यक्तियों, बीमार लोगों या जिनके लिए उपवास हानिकारक हो, उन्हें कठोर या निर्जल व्रत का दबाव नहीं देना चाहिए। स्वास्थ्य-संबंधी प्रश्न में चिकित्सकीय सलाह उचित है।

मंगलवार और शनिवार का संबंध

भारत के अनेक क्षेत्रों में मंगलवार तथा शनिवार को हनुमान उपासना का विशेष दिन माना जाता है। चालीसा-पाठ, मंदिर दर्शन, पूजा तथा प्रसाद इन दिनों भी किए जाते हैं। किंतु साप्ताहिक पूजा और वार्षिक जयंती अलग बातें हैं। केवल मंगलवार या शनिवार देखकर हनुमान जयंती की तिथि निश्चित नहीं की जा सकती। मंगल और शनि से जुड़ी कुछ लोकप्रिय कथाएँ धार्मिक-लोकपरंपरा से आती हैं; उन्हें भौतिक प्रभावों का वैज्ञानिक प्रमाण बताना उचित नहीं। 9

उत्तर भारत: चैत्र पूर्णिमा और रामभक्ति

उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली तथा अन्य उत्तरी क्षेत्रों की प्रमुख मान्यता में चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती आती है। भक्त मंदिरों में दर्शन करते हैं, राम नाम का स्मरण करते हैं और हनुमान चालीसा या सुन्दरकाण्ड के पाठ में भाग लेते हैं। किसी स्थान पर प्रसाद के साथ सामूहिक भंडारा होता है, तो किसी घर में केवल परिवार के साथ पूजा। हनुमान की मूर्ति के समीप राम, सीता और लक्ष्मण का चित्र उनके जीवन का केंद्रीय संबंध प्रकट करता है। 6

अयोध्या का उदाहरण विशेष ध्यान देने योग्य है। समकालीन पंचांग विवरण में हनुमानगढ़ी से संबंधित कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी और दीपावली के समीप हनुमान जन्मोत्सव की परंपरा का उल्लेख मिलता है। इसे चैत्र पूर्णिमा वाली सर्वसाधारण उत्तरी तिथि के साथ बिना भेद किए नहीं मिलाना चाहिए। यह एक अलग मंदिर-विशिष्ट परंपरा का शोध विषय है; वास्तविक कार्यक्रम और तिथि की स्वतंत्र मंदिर-पुष्टि अभी आवश्यक है। 8

महाराष्ट्र और पश्चिम भारत

महाराष्ट्र के कई समुदायों में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा पर मनाई जाती है। जगह-जगह अंजनीपुत्र की पूजा, पाठ और प्रसाद का आयोजन हो सकता है। कुछ परंपराएँ दिन के प्रारंभ में विशेष आराधना करती हैं, लेकिन उससे पूरे महाराष्ट्र के लिए एक ही मुहूर्त या सभी मंदिरों के लिए एक ही कार्यक्रम घोषित नहीं किया जा सकता। 6, 9

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: हनुमान दीक्षा

तेलुगु परंपराओं में हनुमान उपासना का एक महत्वपूर्ण क्रम चैत्र पूर्णिमा से आरंभ होकर वैशाख कृष्ण दशमी तक चलने वाली दीक्षा से संबंधित है। कुछ पंचांग मार्गदर्शिकाएँ इस अवधि को 41 दिनों के रूप में बताती हैं। दीक्षा के साथ वेशभूषा, अनुशासन, जप या आहार के विशेष नियम जुड़े हो सकते हैं, पर वे किसी गुरु, परंपरा या मंदिर के अनुसार निर्धारित होते हैं। इसलिए इस पर्व के सामान्य लेख को सभी पाठकों के लिए दीक्षा-विधि या कठोर व्रत का आदेश नहीं बनाना चाहिए। 6

कर्नाटक: हनुमान व्रतम्

कर्नाटक में प्रसिद्ध एक पंचांग परंपरा मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को हनुमान व्रतम् मानती है। अंजनेय की पूजा, भजन और पाठ से जुड़ी अनेक स्थानीय पद्धतियाँ हैं। यह अपने कैलेंडर-आधार में उत्तर भारत की चैत्र पूर्णिमा से अलग है। हर कन्नड़ भाषी समुदाय का आचरण एक जैसा नहीं होने पर उसे एक ही नियम से बाँधना भी उचित नहीं। 6

तमिलनाडु: हनुमत जयंती या आंजनेयर जयंती

तमिलनाडु में कई समुदाय मार्गळी महीने की अमावस्या के आसपास हनुमत जयंती मनाते हैं। कुछ मान्यताओं में मूल नक्षत्र को भी महत्व दिया जाता है। यहाँ 'मार्गळी' तमिल सौर मास का नाम है; उसे बिना आधार बताए केवल किसी चंद्र मास का पर्याय लिख देना चयन-नियम को बिगाड़ सकता है। तमिलभाषी भक्तों में हनुमान के लिए आंजनेयर नाम भी प्रचलित है। केरल या अन्य प्रदेशों पर यही तिथि अपने आप लागू होने का दावा इस लेख में नहीं किया गया है। 6, 10

ओडिशा: पणा संक्रांति और हनुमान जन्मोत्सव

ओडिशा में पणा संक्रांति, जिसे महाविषुव संक्रांति भी कहते हैं, ओड़िया नववर्ष से संबंधित है। यह परंपरागत मेष सौर संक्रांति के साथ जुड़ी होती है। ओडिशा पर्यटन विभाग इसे हनुमान जन्मोत्सव के अवसर के रूप में भी दर्ज करता है। इस दिन की व्यापक संस्कृति में मंदिर-पूजा और बेल पणा जैसे पेय का वितरण शामिल है। यह क्षेत्रीय सौर आधार महत्वपूर्ण है: इसे चैत्र पूर्णिमा की गणना से प्राप्त दिन कह देना तथ्यात्मक भूल होगी। 7

हनुमान जी के प्रतीकों का संदेश

  • गदा: शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक, जिसका उपयोग उचित उद्देश्य के लिए हो।
  • राम-सीता के प्रति विनम्र मुद्रा: अहंकार से रहित भक्ति का आदर्श।
  • औषधि-पर्वत: लक्ष्मण की सहायता के लिए प्रयत्नशील सेवाभाव का प्रिय चित्रण; कथा के विवरण पाठानुसार बदलते हैं।
  • समुद्र पार करने का दृश्य: भय से परे जाकर जिम्मेदारी निभाने का साहस।
  • सिंदूरयुक्त मूर्ति: कई मंदिरों की स्थापित पूजा-परंपरा; उससे संबंधित लोककथा को अनिवार्य शास्त्रीय नियम न समझें। 3, 4, 5, 9

भक्ति में हनुमान को संकटमोचन कहकर पुकारना प्रचलित है। यह आस्था और भरोसे का संबोधन है। वास्तविक जीवन में आवश्यक चिकित्सकीय उपचार, दूसरों का सहयोग और अपने उत्तरदायित्वों का निर्वाह भी महत्वपूर्ण रहता है।

संदर्भ और स्रोत (10)

यह स्रोत-सूची लेख के साथ दी गई है। स्रोत का लिंक स्वतंत्र पाठ-सत्यापन या पुनः उपयोग अनुमति का प्रमाण नहीं है।

  1. Valmiki Ramayana — Kishkindha Kanda, Sarga 66

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  2. Valmiki Ramayana — Kishkindha Kanda, Sarga 3

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  3. Valmiki Ramayana — Sundara Kanda, Sarga 1

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  4. Valmiki Ramayana — Sundara Kanda, Sarga 36

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  5. Shiva Purana — Shatarudra Samhita, Chapter 20: The Incarnation of Hanumat and his story

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  6. Hanuman Jayanti — the birth anniversary of Lord Hanuman

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  7. Odisha Tourism — Events & Festivals: Pana Sankranti (Maha Bisubha Sankranti)

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  8. Hanuman Jayanti Date and Time — regional Ayodhya / Diwali Hanuman Puja notes

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  9. Hanuman Puja Vidhi — traditional practice overview

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  10. Tamil Hanumath Jayanthi date — explanation and local calendar notes

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लेख में दी गई विस्तृत स्रोत-टिप्पणियाँ

संदर्भ और आगे का अध्ययन

  • 1 वाल्मीकि रामायण, किष्किन्धाकाण्ड 66 — जाम्बवान, अंजना और वायु का संबंध।
  • 2 वाल्मीकि रामायण, किष्किन्धाकाण्ड 3 — सुग्रीव के दूत के रूप में हनुमान।
  • 3 वाल्मीकि रामायण, सुन्दरकाण्ड 1 — समुद्र-लाँघन।
  • 4 वाल्मीकि रामायण, सुन्दरकाण्ड 36 — श्रीराम की मुद्रिका और सीता को आश्वासन।
  • 5 शिवपुराण, शतरुद्रसंहिता 20 — विशिष्ट शैव जन्म और अवतार कथा।
  • 6 दृक् पंचांग, Hanuman Jayanti — विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं का समकालीन परिचय।
  • 7 ओडिशा पर्यटन विभाग, Pana Sankranti — ओड़िया परंपरा।
  • 8 दृक् पंचांग, हनुमान जयंती तिथि संबंधी नोट — दीपावली-संबद्ध अयोध्या परंपरा।
  • 9 हनुमान पूजा तथा पाठ की समकालीन व्याख्याएँ — क्षेत्र-विशिष्ट व्यवहार के लिए, शास्त्रीय सार्वभौमिक विधान नहीं।
  • 10 दृक् पंचांग, तमिल Hanumath Jayanthi — तमिल प्रचलन।
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